Shivpuri News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित खूबत बाबा मंदिर आस्था और विश्वास का ऐसा केंद्र है, जिसकी गूंज आसपास के जिलों तक सुनाई देती है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि जो भी सच्चे मन से बाबा के दरबार में मन्नत मांगता है, उसकी कामना जरूर पूरी होती है. मन्नत पूरी होने पर बकरे की बलि देने की परंपरा इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है.
संतान, बीमारी और सुख-शांति के लिए लगती है मन्नत
खूबत बाबा के दरबार में संतान प्राप्ति, गंभीर बीमारियों से मुक्ति और पारिवारिक सुख-शांति के लिए श्रद्धालु मन्नत मांगते हैं. मान्यता है कि बाबा अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते. यही वजह है कि यहां आने वाला कोई भी श्रद्धालु खुद को खाली हाथ नहीं मानता, चाहे उसकी मन्नत तुरंत पूरी हो या समय लेकर.
शेर के रूप में जंगलों में विचरते थे बाबा!
स्थानीय लोगों की जुबानी एक रहस्यमय लोककथा आज भी प्रचलित है. कहा जाता है कि मामोनी गांव में बरेठा बाबा के मामा रहते थे, जिन्हें आज खूबत बाबा के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि बाबा में अलौकिक शक्तियां थीं और वे शेर का रूप धारण कर जंगलों में घूमते थे. कहते हैं एक दिन बाबा शेर के रूप में अपने मामा के घर पहुंचे और उनके मुंह में एक बकरा था. यह दृश्य देखकर गांव में अफरा-तफरी मच गई. इसके बाद बाबा जंगलों में लुप्त हो गए. तभी से बाबा की दिव्यता और शक्ति को लेकर लोगों की आस्था और मजबूत हो गई.
बंजारे को मिले दर्शन, यहीं से शुरू हुई मंदिर की कहानी
किंवदंती के अनुसार एक बार एक बंजारे को बाबा ने स्वप्न में दर्शन दिए. बंजारे को संतान नहीं थी. बाबा ने उसे संतान प्राप्ति का वरदान दिया और कहा कि उसी स्थान पर एक चबूतरा बनवाए. बंजारे की मनोकामना पूरी हुई और उसने बाबा के आदेश अनुसार चबूतरा बनवाया. समय के साथ यही चबूतरा एक भव्य मंदिर में बदल गया. बाद में यहां नाटानी मैया की भी पूजा शुरू हुई. आज यह स्थान मामोनी गांव ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है.
300 साल पुरानी परंपरा, बुधवार-रविवार को उमड़ती है भीड़
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार खूबत बाबा मंदिर करीब 300 साल पुराना है. पहले यह छोटा सा स्थान था, लेकिन भक्तों की श्रद्धा के साथ इसका विस्तार होता गया. हर बुधवार और रविवार को यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है. मन्नत पूरी होने पर लोग बाबा के दरबार में बकरे की बलि चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं.
घाटी से गुजरते वाहन क्यों बजाते हैं हॉर्न?
इस मंदिर से जुड़ी एक और रोचक मान्यता है. कहा जाता है कि बाबा की घाटी से गुजरने वाले वाहन चालक हॉर्न बजाकर निकलते हैं. मान्यता है कि जो ऐसा नहीं करता, उसे अपनी गलती का अहसास जरूर हो जाता है. यही विश्वास इस दरबार को और भी रहस्यमय और खास बनाता है.
आस्था, विश्वास और परंपरा का संगम
खूबत बाबा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, लोककथाओं और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं का जीवंत उदाहरण है. यही वजह है कि जंगलों के बीच बसा यह दरबार आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है.