कम नींद बना रही बीमार! हार्ट-बीपी-शुगर और कैंसर का खतरा, चौंकाने वाली रिसर्च

कम नींद बना रही बीमार! हार्ट-बीपी-शुगर और कैंसर का खतरा, चौंकाने वाली रिसर्च


सागर. भारत सहित दुनियाभर में तेजी से बीपी, शुगर और हार्ट के पेशेंट बढ़ रहे हैं. इसको लेकर कर्नाटक की बेलगाम यूनिवर्सिटी में एक चौंकाने वाली रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है. इसमें पता चला है कि नींद की कमी की वजह से इंसानी शरीर के अंदर एंजाइम कम हो जाते हैं, जिससे बायोलॉजिकल संतुलन बिगड़ जाता है और इस तरह की बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं क्योंकि लाखों साल से जो सोने को लेकर परंपरा चली आ रही है, उसमें अब बहुत बदलाव देखा जा रहा है. लोग दिनभर काम करते हैं, ऐसे में बॉडी आराम कर रिकवर करती है लेकिन काम करने के बाद लोग देर रात तक भारी खाना खाते हैं, जागते हैं, पार्टी करते हैं, शराब पीते हैं, ऐसे में शरीर में मेलाटोनिन की कमी होने लगती है.

बेलगाम के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर माधव प्रभु लोकल 18 को बताते हैं कि आज के समय में हार्ट, बीपी, शुगर और कैंसर का संबंध नींद की कमी से है, इसलिए हर इंसान को अगर स्वस्थ रहना है, तो आराम करने और नींद समय से लेने पर ध्यान देना चाहिए. हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि शाम होने के कुछ समय के बाद सो जाएं और ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:30 बजे उठ जाएं. ऐसा करने से हमारा मेलाटोनिन नामक एंजाइम तो ठीक रहता ही है, इससे होने वाली कई तरह की बीमारियों से भी बचाव किया जा सकता है. यूनिवर्सिटी में उन्होंने करीब 200 लोगों पर रिसर्च की और इस तरह के परिणाम सामने आए.

तो बढ़ने लगता है मेलाटोनिन
उन्होंने कहा कि अगर हम नॉर्मल तरीके से नींद लेना शुरू कर देते हैं, जैसे कि रात 10 बजे तक सो जाते हैं और सुबह 4:30 से 5 बजे तक उठ जाते हैं और यह हम अपने रूटीन में ले आते हैं, तो इसकी वजह से जो मेलाटोनिन नाम का एंजाइम होता है, वह भी बढ़ने लगता है यानी कि वह पहले की तरह ही रिकवर होने लगता है. यंग लोगों में यानी कि स्विफ्ट वर्कर में देखा गया है कि उनका यह एंजाइम बहुत ही डिस्टर्ब होता है क्योंकि वह कभी नाइट शिफ्ट करते हैं, तो कभी मॉर्निंग वाली शिफ्ट करते हैं. कभी दोपहर में भी आना पड़ता है, जिसकी वजह से उनका सबकुछ गड़बड़ हो जाता है लेकिन जब वह नॉर्मल तरीके से अपनी नींद समय के अनुसार लेने लगते हैं, तो वह धीरे-धीरे रिकवर हो जाते हैं.

बढ़ती उम्र में कम होने लगता एंजाइम
मेलाटोनिन में यह भी देखा गया है कि जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती है, तो यह एंजाइम धीरे-धीरे कम होने लगता है और उन्हें नींद कम आती है. ऐसे में उन्हें भरपूर नींद लेने के लिए सब्सीट्यूट के रूप में इसकी टेबलेट लेनी पड़ती है ताकि उनका लेवल फिर से वापस आ सके. आज बहुत से लोग इसकी वजह से परेशान हैं लेकिन अगर दोपहर के समय दही और चावल को खाना शुरू करें, तो इसमें जो विटामिन मिलता है, उसकी वजह से हमारा मेलाटोनिन ठीक हो जाता है लेकिन दही और चावल रात में नहीं खाना चाहिए.

बता दें कि सागर स्थित डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटीग्रेटेड बायोलॉजिकल रिसर्च (ICIBR-2026) का आयोजन स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज़ के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा किया जा रहा है. सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित जीवविज्ञानी, पारिस्थितिकीविद्, स्वास्थ्य वैज्ञानिक और शिक्षाविद् शोध प्रस्तुत कर रहे हैं.



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