आशापुर हाईवे मरम्मत में करोड़ों के घोटाले का आरोप: महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रीना बौरासी ने हरदा में भाजपा सरकार पर साधा निशाना – Harda News

आशापुर हाईवे मरम्मत में करोड़ों के घोटाले का आरोप:  महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रीना बौरासी ने हरदा में भाजपा सरकार पर साधा निशाना – Harda News




महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष रीना बौरासी शुक्रवार शाम को पहली बार हरदा पहुंचीं। जिला कांग्रेस कार्यालय में उन्होंने महिलाओं के साथ कांग्रेस को मजबूत करने और आंदोलनों में भागीदारी पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने महिलाओं की कम संख्या देखकर नाराजगी भी जताई। मीडिया से बातचीत में प्रदेशाध्यक्ष बौरासी ने बताया कि कांग्रेस महिला संगठन को मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो भी महिला पदाधिकारी दिए गए लक्ष्य को पूरा करेंगी, उन्हें भविष्य में संगठन में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसमें उन महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी जो सड़क पर महिलाओं के मुद्दों के लिए संघर्ष करती हैं। जब उनसे भाजपा के कार्यक्रमों में महिलाओं की अधिक संख्या और कांग्रेस में कम संख्या को लेकर सवाल किया गया, तो बौरासी ने जवाब दिया कि अब मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं, आप अगले दौरे में हरदा में बड़ी संख्या में महिलाओं को देखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में है, इसलिए वह आशा कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाती है, जबकि हमारी पार्टी में महिलाएं स्वतंत्र हैं और हम किसी पर दबाव नहीं बनाते। कहा- पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर
बौरासी ने आरोप लगाया कि आशापुर हाईवे की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है। उन्होंने कहा कि इस हाईवे के गड्ढे भरने के काम पर 21 करोड़ रुपए खर्च करना भाजपा नेताओं के ‘जेब भरो अभियान’ का हिस्सा है। इस मार्ग पर गड्ढे भरने के नाम पर खर्च की गई राशि की जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासनकाल में पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने हाल ही में मंत्री इंदर सिंह परमार के अबगांव खुर्द के आदर्श महाविद्यालय के निरीक्षण का जिक्र किया, जहां 8 करोड़ की लागत से बने भवन में टाइल्स हाथ से निकल रही थीं, लेकिन मंत्री ने कार्रवाई करने के बजाय केवल नाराजगी जताकर मामले को टाल दिया। किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हरदा क्षेत्र में करीब 60,000 हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है, लेकिन इस बार किसानों को उचित मूल्य नहीं मिला। उन्होंने बताया कि मक्का सामान्य रूप से 1000 रुपए प्रतिक्विंटल और सूखी मक्का 1700 रुपए में बिकी, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 800 रुपए का नुकसान हुआ। उन्होंने सरकार से भावांतर योजना के तहत किसानों को मुआवजा देने की मांग की।



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