गेहूं में कब करें यूरिया का छिड़काव? इन टिप्स से दाना बनेगा मोटा, पैदावार डबल

गेहूं में कब करें यूरिया का छिड़काव? इन टिप्स से दाना बनेगा मोटा, पैदावार डबल


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Agriculture News: वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 से कहा कि गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के 40 से 45 दिन के बीच करनी चाहिए. इस दौरान यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि खेत में कहीं भी पानी एक जगह जमा न होने पाए. जलभराव की स्थिति में पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे फसल की बढ़वार प्रभावित होती है.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र को गेहूं उत्पादन के बड़े क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां किसान मेहनत और समय पर सिंचाई करके अच्छी पैदावार की उम्मीद रखते हैं लेकिन कई बार छोटी सी लापरवाही पूरी फसल को नुकसान पहुंचा देती है. खासतौर पर गेहूं की दूसरी सिंचाई यदि सही समय और सही तरीके से न की जाए, तो फसल पीली पड़ने लगती है और उत्पादन में गिरावट का खतरा बढ़ जाता है. फरवरी के पहले सप्ताह में विंध्य क्षेत्र के कई किसान अगेती गेहूं की फसल में दूसरी सिंचाई कर रहे हैं. यह समय फसल के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसी चरण में पौधों की बढ़वार तेज होती है. ऐसे में सिंचाई में की गई गलती सीधे उपज पर असर डालती है.

सीधी के वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं की दूसरी सिंचाई करते समय समय का चुनाव बहुत अहम होता है. उनके अनुसार, शाम के समय हल्की सिंचाई करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. शाम के वक्त हवा की गति कम होती है, जिससे पानी धीरे-धीरे मिट्टी में समा जाता है. इससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सुबह तक खेत सूखा नजर आता है, जिससे फसल हरी-भरी दिखने लगती है.

कब करें दूसरी सिंचाई?
संजय सिंह ने बताया कि गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के 40 से 45 दिन के बीच करनी चाहिए. इस दौरान यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि खेत में कहीं भी पानी एक जगह इकट्ठा न होने पाए. जलभराव की स्थिति में पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे फसल की ग्रोथ प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है, इसलिए खेत की मेड़ और नालियों की सही व्यवस्था जरूरी है.

फसल के लिए खतरनाक
कृषि अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि ज्यादा सिंचाई भी फसल के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. अत्यधिक पानी देने से मिट्टी जरूरत से ज्यादा नरम हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ों की पकड़ कमजोर पड़ जाती है, ऐसे में तेज हवा चलने पर फसल गिरने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे पैदावार को भारी नुकसान हो सकता है.

चार दिन बाद फसल में यूरिया का प्रयोग लाभदायक
उन्होंने आगे बताया कि दूसरी सिंचाई के चार दिन बाद गेहूं की फसल में यूरिया का प्रयोग करना लाभदायक होता है. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और हरियाली बनी रहती है. यदि फसल पीली पड़ने लगे, तो मैन्कोजेब दवा का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. सही समय पर उचित देखभाल और संतुलित सिंचाई से गेहूं की खेती किसानों के लिए अच्छा मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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