दातुन कब करें इस्तेमाल: आज के समय में जहां लोग ब्रश और टूथपेस्ट पर निर्भर हो गए हैं, वहीं आयुर्वेद में दातुन को दांतों के साथ-साथ पूरे शरीर के लिए फायदेमंद माना गया है. रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ के अनुसार, दातुन सिर्फ दांत साफ करने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण स्वास्थ्य पद्धति है. प्राकृतिक टहनियों से बनी दातुन दांतों को मजबूत बनाती है, मसूड़ों को स्वस्थ रखती है और कई रोगों से बचाव में भी सहायक होती है.
अष्टांग हृदयम में दातुन का विशेष उल्लेख
डॉ. कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टांग हृदयम में महर्षि वाग्भट ने दातुन के बारे में विस्तार से बताया है. इसमें यह वर्णन है कि दातुन कैसी होनी चाहिए, किस महीने कौन-सी दातुन करनी चाहिए और इसके क्या-क्या लाभ हैं. आयुर्वेद के अनुसार, वही दातुन श्रेष्ठ मानी जाती है जिसका स्वाद कसैला या कड़वा हो.
नीम सबसे श्रेष्ठ, लेकिन विकल्प भी हैं कई
डॉ. कुलश्रेष्ठ के अनुसार नीम से अधिक कड़वा क्या हो सकता है, इसलिए नीम की दातुन सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है. इसके अलावा मदार, बबूल, अर्जुन, आम, अमरुद, जामुन, महुआ, करंज, बरगद, अपामार्ग, बेर, शीशम और यहां तक कि बांस की दातुन का भी आयुर्वेद में वर्णन मिलता है. कुल मिलाकर करीब 12 ऐसे वृक्ष बताए गए हैं जिनकी दातुन की जा सकती है.
मौसम के हिसाब से करें दातुन
आयुर्वेद में दातुन के लिए मौसम भी तय किए गए हैं. चैत्र माह से लेकर पूरी गर्मी: नीम, मदार या बबूल
सर्दियों में: अमरुद या जामुन
बरसात में: आम या अर्जुन
मौसम के अनुसार दातुन करने से शरीर को अधिक लाभ मिलता है.
नीम की दातुन के चौंकाने वाले फायदे
नीम की दातुन लगातार नहीं करनी चाहिए. तीन महीने तक करने के बाद बीच में विराम जरूरी है. नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दांतों की प्लाक, बैक्टीरिया, मसूड़ों की सूजन, खून आना और मुंह की दुर्गंध को दूर करते हैं. नीम की छाल में मौजूद निम्बीन और मार्गोसीन तत्व पायरिया, दांतों में कीड़ा और मसूड़ों की सूजन में बेहद लाभकारी हैं. ग्रंथों में यहां तक वर्णन है कि गर्भवती महिलाओं द्वारा नीम की दातुन करने से गर्भस्थ शिशु निरोगी जन्म लेता है.
बबूल, अर्जुन, महुआ और बरगद के लाभ
बबूल की दातुन कफ-पित्तनाशक मानी जाती है और मसूड़ों से खून, मुंह के छाले व फेफड़ों की समस्याओं में लाभ देती है. अर्जुन की दातुन हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह में सहायक मानी गई है. महुआ वात-पित्त संतुलन के साथ दांतों की कमजोरी दूर करता है. बरगद की दातुन आंखों की रोशनी बढ़ाने और गर्भावस्था की समस्याओं में रामबाण मानी जाती है.
कैसे और कब करें दातुन
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार दातुन 6 से 8 इंच लंबी होनी चाहिए और उसे अच्छे से कूची बनाकर करना चाहिए. सुबह-शाम दातुन करना अधिक फायदेमंद माना गया है. दातुन करते समय उकड़ू बैठना चाहिए, जिससे इसका लाभ पूरे शरीर को मिलता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.