श्याेपुर9 घंटे पहले
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काव्य सरिता ऑनलाइन मंच श्योपुर के तत्वावधान में बीती रात ऑनलाइन कवि सम्मेलन हुआ। जिसमें देश के कई जाने माने कवियाें ने भाग लिया। दीपांजली दुबे ने नमन करूं मां शारदे दे दो मुझको ज्ञान, गीत गजल छंद लिखूं दे दो यह वरदान वंदना पेशकर कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पटियाला से सरिता नौहरिया ने कहा उम्मीद लगाए नम आंखों से खुष्क बादल को,देखता है मेरे देश का किसान पक्तियाें पर श्राेताओं की दाद बटाेरी।
नितिन मिश्रा निश्छल सीतापुर ने अपनी बात कुछ इस अंदाज में कही सुन लो निज जननी की पुकार, जागो भविष्य के कर्णधार… जोधपुर से मधु वैष्णव ने- ता उम्र छाया बनकर भ्रम यूं साथ चला है, फूलों की तपस्या को भंवरों ने क्यों छला है गीत से कवि सम्मेलन काे ऊंचाई दी। नरेश चंद्र उनियाल पौड़ी गढ़वाल ने एक दिन बैठे थे हम तुम जिस जगह पीपल तले, वह सड़क का मोड़ मुझको याद आता है बहुत गजल सुनाई। भीलवाड़ा की वीर रस की कवयित्री मधु सिंह राजपूत ने कहा मां की परछाई पिता की आन होती हैं बेटियां, हंसती मुस्कुराती घर की फुलवारी होती हैं बेटियां।
निर्मला शर्मा फरीदाबादी ने कहा मेरी छोटी सी बेटी बड़ी हो गई, जिंदगी की डगर पर खड़ी हो गई। करौली के कवि हितेंद्र शर्मा ने मिली छाया खुले नभ की धरा आधार है मेरा, बिखेरूं प्यार की खुशबू यही व्यापार है मेरा पंक्तियाें के साथ शृंगार प्रधान रचनाएं सुनाई।
उत्तरकाशी से साधना जोशी ने जननी जन्म दात्री पालक पोषक ममता की प्रतिमूर्ति, वात्सल्य रस को छलकाने वाली मां की भूमिका इस धरा पर सबसे अनोखी और विजयपुर से हरिबिलास कोठारी ने उठो सपूतों भारत के आकर कर्तव्य निभाओ, यह देश हुआ वीराना देश की लाज बचाओ गीत से नाैजवानाें में जाेश भरा। अनीता त्रिपाठी कानपुर, अनिल गुप्ता गुना ने गीत प्रस्तुत किए। संचालन शिवपुरी के हास्य कवि बसंत श्रीवास्तव ने किया। अंत में काव्य सरिता मंच श्याेपुर के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा सागर ने आभार व्यक्त किया।