जब हो घना अंधेरा तो सूर्य के उदय का इंतजार रहता है, कप्तान नहीं लीडर की कहानी

जब हो घना अंधेरा तो सूर्य के उदय का इंतजार रहता है, कप्तान नहीं लीडर की कहानी


मुंबई. वानखेड़े स्टेडियम की चमकदार फ्लडलाइट्स के नीचे भारतीय टीम मुश्किल में थी. घरेलू दर्शकों की उम्मीदें डगमगाने लगी थीं और स्कोरबोर्ड डराने लगा था. तभी मैदान पर उतरा एक लीडर और उनका बल्ला चला तो सिर्फ रन नहीं बने, भरोसा भी लौटा. संदर्भ भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव का है, जिन्होंने टी 20 वर्ल्ड कप के मैच में संकट में घिर चुकी भारतीय टीम के लिए यूएसए के सामने अपनी चमक बिखेरी और संकट के अंधेरे में घिर चुकी भारतीय टीम को पहले कप्तान बनकर भरोसा दिया, सूर्य की तरह उम्मीद की किरण दी और बाद में 161 रन को डिफेंड करने मैदान में उतरे तो अपनी लीडरशिप में जीत की राह दिखा दी. 10 चौके और 4 छक्कों के साथ पहले बल्लेबाजी में जबरदस्त धमाल किया और फिर अपक्षाकृत लो स्कोर वाले मैच में कमाल की कप्तानी में टीम इंडिया को जीत दिलाकर भारत के लिए विश्व कप की शुभ शुरुआत करवा दी.

मैच की शुरुआत और टॉस

7 फरवरी 2026 को वानखेड़े में मैच शुरू हुआ और अमेरिका के कप्तान मोनांक पटेल ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी चुनी. भारत के लिए यह घरेलू विश्व कप की शुरुआत थी. सूर्यकुमार यादव पहली बार पूर्णकालिक कप्तान के रूप में उतरे. टीम में ईशान किशन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ी थे. वहीं, जसप्रीत बुमराह बीमार होने से बाहर थे इसलिए मोहम्मद सिराज को मौका मिला. भारत डिफेंडिंग चैंपियन है और घरेलू मैदान पर दबाव था. शायद यही कारण रहा कि भारतीय टीम शुरुआत से ही लड़खड़ाने लगी.

बैटिंग का पतन

भारत की पारी की शुरुआत में ही अभिषेक शर्मा आउट हो गए. इसके बाद थोड़े अंतराल पर ही जल्दी-जल्दी विकेट गिरने लगे. पावरप्ले में ही चार विकेट गिर गए. अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा (25 रन) और शिवम दुबे जल्दी आउट हो गए. स्कोर 46/4 हो गया. फिर रिंकू सिंह और हार्दिक पंड्या भी नहीं टिके. 14 ओवर में भारत का स्कोर 86/6 पर था. अमेरिका के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया. नेट्रावलकर, अली खान और वान शाल्कविक ने विकेट चटकाए.एक समय तो ऐसा लग रहा था कि भारत 120-130 तक ही पहुंच पाएगा.

सूर्यकुमार का धमाल

मैदान में मौजूद दर्शक भारतीय टीम के प्रदर्शन से निराश होने लगे थे. ऐसे में मैदान पर उतरे कप्तान सूर्यकुमार यादव. उन्होंने संकट में टीम को संभालना शुरू किया. शुरुआत में वह भी सतर्क रहे, लेकिन फिर आक्रामक हो गए. 36 गेंदों पर उन्होंने अपने 50 रन पूरे किए. इसके बाद तो अंतिम ओवरों में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की. 49 गेंदों पर सूर्य कुमार यादव नाबाद 84 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल थे. अक्षर पटेल के साथ 41 रनों की साझेदारी की जो टी20 विश्व कप में सातवें विकेट के लिए भारत का रिकॉर्ड है. सूर्यकुमार ने स्कूप शॉट्स, कट और पुल से दर्शकों को रोमांचित किया. भारत का स्कोर 161/9 पहुंचा. यह एक लो स्कोर मैच था, लेकिन सूर्यकुमार की वजह से डिफेंड करने लायक हो गया.

कप्तान का कमाल सूर्यकुमार यादव की 84 रन की पारी ने भारत को दिलाई जीत

गेंदबाजी में कमाल

सूर्य की पारी ने इतिहास रच दिया था क्योंकि डेब्यू कप्तान के रूप में टी20 विश्व कप में सबसे बड़ा स्कोर है. ब्रेक के बाद भारत ने गेंदबाजी शुरू की. अमेरिका को 162 रनों का लक्ष्य था. मोहम्मद सिराज ने 29 रन पर 3 विकेट चटकाए. अर्शदीप सिंह ने शुरुआत में ही दो विकेट लिए . अक्षर पटेल ने डबल स्ट्राइक किया और वरुण चक्रवर्ती ने भी विकेट चटकाए. अमेरिका के बल्लेबाज दबाव में आ गए. वे 132/8 पर सिमट गए. भारत ने 29 रनों से जीत दर्ज की. सूर्यकुमार की कप्तानी शानदार रही. उन्होंने फील्डिंग सेट की और गेंदबाजों को सही से इस्तेमाल किया. मैच के बाद उन्होंने कहा, “हमने खुद को चुनौती दी और जीत हासिल की.”

लीडरशिप की मिसाल

सूर्यकुमार यादव ने न सिर्फ बल्ले से, बल्कि लीडरशिप से सबका दिल जीता. टीम संकट में थी, लेकिन उन्होंने भरोसा दिया. यह मैच भारत के लिए विश्व कप की शुभ शुरुआत था. घरेलू दबाव के बावजूद उन्होंने अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ मैच बिना दबाव दिखाते हुए खेला. सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ हो रही है. एक पोस्ट में कहा गया, “सूर्यकुमार यादव ने आज बचा लिया.” इसलिए तो कहते हैं जब अंधेरा घना हो तो सूर्य के उगने का इंतजार रहता है. अमेरिका के साथ मैच में सूर्य कुमार ने एक कप्तान से ज्यादा एक लीडर की भूमिका निभाई. अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में सूर्यकुमार ने न सिर्फ पारी संभाली, बल्कि यह दिखा दिया कि संकट की घड़ी में कप्तान कैसे टीम को रोशनी दिखाता है.



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