गौकशी, ड्रग्स, लव जिहाद! प्रियंक कानूनगो का बड़ा खुलासा- भोपाल क्राइम कैपिटल

गौकशी, ड्रग्स, लव जिहाद! प्रियंक कानूनगो का बड़ा खुलासा- भोपाल क्राइम कैपिटल


शिवकांत आचार्य
भोपाल.
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि भोपाल अपराधों के मॉडल का गढ़ बन गया है. अरेरा कॉलोनी में मंदिर-अस्‍पताल के पास बनी शराब दुकान को लेकर उन्‍होंने नाराजगी जाहिर करते हुए राजधानी पर सवाल उठा दिया. उन्‍होंने शहर को लेकर ऐसे दावे किए हैं, जो प्रशासन, पुलिस और समाज तीनों के लिए चेतावनी की तरह हैं. उनका कहना है कि भोपाल में अलग-अलग अपराध अपने-अपने स्तर पर नहीं, बल्कि एक संगठित मॉडल की तरह काम कर रहे हैं. इस मॉडल में गौकशी, ड्रग्स, यौन अपराध और पहचान छिपाकर शोषण जैसे मामलों की कड़ियां आपस में जुड़ी हुई दिखाई देती हैं. उन्‍होंने कहा कि हिंदू बेटियों को टारगेट किया गया. शार‍िक मछली, एमडी ड्रग्‍स कांड, लव जिहाद, नगर निगम के स्‍लॉटर हाउस में गायों की हत्‍याएं समाज के लिए कलंक हैं.

कानूनगो के अनुसार, भोपाल स्लॉटर हाउस से जुड़े मामले ने इस पूरे नेटवर्क को उजागर किया है. पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने दावा किया कि स्लॉटर हाउस किसी निजी व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि नगर निगम द्वारा संचालित किया जा रहा था. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर संचालन सरकारी तंत्र के हाथ में था, तो एफआईआर सिर्फ निजी लोगों तक सीमित क्यों रही? उन्‍होंंने कहा कि एक आदमी इस तरह से काम नहीं कर सकता, पूरा सरकारी तंत्र जांच के दायरे में होना चाहिए, नगर निगम के अफसरों को क्‍यों छोड़ा जाए?

अरेरा कॉलोनी में शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन
भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित आर्य समाज मंदिर के बाहर रविवार को रहवासियों ने शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. रहवासियों का कहना है कि मंदिर के बेहद पास शराब का ठेका संचालित हो रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और क्षेत्र का सामाजिक माहौल भी खराब हो रहा है. प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्वयं इंच टेप की मदद से मंदिर और शराब ठेके के बीच की दूरी नापी. नाप में यह दूरी मात्र 29 मीटर पाई गई. कानूनगो ने कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल से 100 मीटर के दायरे में शराब दुकान संचालित नहीं हो सकती, लेकिन यहां नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है. उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में वह रहवासियों के साथ खड़े हैं और शराब ठेका हटवाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा.

स्लॉटर हाउस केस में बड़ा दावा
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि भोपाल स्लॉटर हाउस मामले में पुलिस ने जो रिपोर्ट आयोग को सौंपी है, उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि संचालन नगर निगम के जिम्मे था. इसके बावजूद एफआईआर नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर दर्ज नहीं की गई. उनका कहना है कि जब सिस्टम खुद संचालन कर रहा था, तो जवाबदेही तय करना भी सिस्टम की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि असलम चमड़ा कोई अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा नेक्सस है, जो कई स्तरों पर फैला हुआ है. यह नेक्सस केवल अवैध गतिविधियों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से भी जुड़ा हुआ दिखता है. भोपाल के जिंसी स्थित स्‍लाटर हाउस से 26.5 टन मांस जब्त किया गया था, जिसके बाद गोकशी का खुलासा हुआ. इस मामले में पुलिस ने असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को मुख्य आरोपित बनाया है. जिस कंटेनर से मांस जब्‍त हुआ था; उसके ड्राइवर शोएब को भी गिरफ्तार किया जा चुका है.

भोपाल में अपराधों का पैटर्न
कानूनगो ने भोपाल को “अपराधों के मॉडल का गढ़” बताते हुए कहा कि यहां अलग-अलग तरह के अपराध एक तय पैटर्न में सामने आ रहे हैं. उनका दावा है कि गौकशी, ड्रग्स और यौन अपराधों के पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भोपाल में सांप्रदायिक लैंगिक अपराध कोई नई बात नहीं है. बीते वर्षों में कई मामलों में पीड़ितों ने शिकायत की कि वे आरोपियों का नाम लेने तक से डरते हैं. यह डर पुलिस और अपराधियों के कथित गठजोड़ से पैदा होता है.

पुलिस की भूमिका पर सवाल
प्रियंक कानूनगो ने भोपाल पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि कई मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने से बचती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “मछली” जैसे कोड नामों के तहत अपराध दर्ज किए जाते हैं, लेकिन असली नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश नहीं होती. उनके अनुसार, जब अपराधियों को खुला छोड़ा जाता है, तो अपराध पर काबू पाना लगभग असंभव हो जाता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि आयोग के पास कुछ ऐसे सबूत आए हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. ये सबूत प्रशासन को सौंपे गए, लेकिन अब तक की कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही.

जिम और पहचान बदलकर शोषण के आरोप
कानूनगो ने भोपाल से लखनऊ तक फैले एक और पैटर्न का जिक्र किया. उनके अनुसार, कुछ जिम और फिटनेस सेंटरों के जरिए हिंदू लड़कियों को टारगेट किया जा रहा है. आरोप है कि पहचान बदलकर पहले यौन शोषण किया जाता है और बाद में धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की शिकायतें अलग-अलग शहरों से आ रही हैं, लेकिन पैटर्न लगभग एक जैसा है. यह दर्शाता है कि यह व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि संगठित गतिविधि हो सकती है.



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