बीते दो सालों से जिले में मक्के की जमकर पैदावार हो रही है। इससे सालभर मंडी में मक्के की आवक बनी हुई है। आमतौर पर इन दिनों में मक्का खत्म हो जाता है। मंडी में दूसरे अनाज बिकने के लिए आते हैं। लेकिन इस साल मंडी में अभी भी मक्के की बंपर आवक हो रही है। बीते दो सालों में मंडी में मक्के की आवक 380 प्रतिशत बढ़ गई है। हालांकि इस साल रेट कम मिल रहा है, लेकिन इसके बाद भी मंडी में 2023 के मुकाबले टैक्स ज्यादा मिला है। जानकारी के अनुसार मक्के की लगातार बाहर डिमांड बढ़ रही है। इसके चलते किसानों ने इसकी ओर रुचि ली है। जिसके चलते अधिकांश किसानों ने खेतों में मक्का की फसल बोई थी। अशोकनगर मंडी की स्थिति देखें तो यहां पर वर्ष 2023 में 2 लाख 80 हजार 312 क्विंटल मक्के की आवक हुई थी। यह 2024 में बढ़कर 11 लाख 49 हजार 10 क्विंटल हो गई। वहीं 2025 में बढ़कर यह 12 लाख 85 हजार 560 क्विंटल हो गई है। यानी तीन सालों में मक्के की आवक बढ़कर करीब 380 प्रतिशत अधिक हो गई है। इसका लाभ यह हुआ है कि मंडी में टैक्स कलेक्शन भी बढ़ गया है। 0.5 प्रतिशत घटा टैक्स, लेकिन आवक 23% बढ़ी दो साल पहले शासन ने मंडी टैक्स 1.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद मंडी में आवक के अनुसार टैक्स में कमी आना थी, लेकिन मक्के की जमकर आवक के कारण टैक्स कलेक्शन घटने के बजाए बढ़ गया है। मंडी सचिव भागीरथ अहिरवार के अनुसार वर्ष 2023-24, 2024-25 के मुकाबले मंडी टैक्स में इजाफा हुआ है। पिछले साल की तुलना में इस बार अभी तक 23 प्रतिशत ज्यादा टैक्स कलेक्शन हो चुका है।
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