सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर कलेक्टकर का बयान: बोले- जमानत पेश न होने तक रिहाई संभव नहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध करने पर हुए गिरफ्तार – Chhatarpur (MP) News

सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर कलेक्टकर का बयान:  बोले- जमानत पेश न होने तक रिहाई संभव नहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध करने पर हुए गिरफ्तार – Chhatarpur (MP) News




छतरपुर जिले के बिजावर में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहा आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। फिलहाल अमित भटनागर जेल में हैं और उनकी रिहाई जमानत प्रक्रिया पूरी होने तक संभव नहीं है। क्या है पूरा मामला केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत डोढन बांध और नहर निर्माण का काम चल रहा है। इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी। परियोजना का उद्देश्य केन नदी का पानी बेतवा नदी तक पहुंचाकर सिंचाई और पानी की समस्या का समाधान करना है। लेकिन इस परियोजना से कई गांवों की जमीन प्रभावित हो रही है। आदिवासी किसानों का कहना है कि उनकी खेती की जमीन, घर और जंगल अधिग्रहण की जद में आ गए हैं। वे उचित मुआवजा, पुनर्वास और जमीन की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। आंदोलन कैसे शुरू हुआ बिजावर और आसपास के गांवों के किसान और आदिवासी लंबे समय से मुआवजे और पुनर्वास को लेकर आवाज उठा रहे थे। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर उनकी अगुवाई कर रहे थे। उनका आरोप है कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी है और प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा। ग्राम ढोंडन में बांध निर्माण स्थल पर प्रदर्शन के कारण काम भी रोक दिया गया था। 8 फरवरी 2026 को पुलिस ने अमित भटनागर को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन ने उन पर शांतिभंग की कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया। जमानत की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें रिहा नहीं किया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। दोपहर करीब 3 बजे से चक्का जाम कर दिया गया, जिससे बिजावर–मातगुवां मार्ग पर यातायात ठप हो गया। बारात और प्रदर्शनकारियों में हुआ विवाद देर रात एक बारात मांगलिक भवन जा रही थी। प्रदर्शन के कारण रास्ता बंद था, जिससे बारातियों और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद हो गया। पुलिस के हस्तक्षेप से बारात को सुरक्षित निकाला गया। प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। करीब 40 ग्रामीणों के खिलाफ सड़क जाम और शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। अपर कलेक्टर ने कहा- नियम विरुद्ध मुआवजा मांग रहे अपर कलेक्टर मिलिंद नागदेव ने कहा कि कुछ लोग नियम विरुद्ध मुआवजे की मांग को लेकर लोगों को भड़का रहे हैं। उन्होंने बताया कि पात्र लोगों को नियमानुसार लाभ दिया जा चुका है। यदि कोई पात्र व्यक्ति छूट गया है तो उसका सर्वे कर जांच की जाएगी। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने स्पष्ट किया कि अमित भटनागर की रिहाई के लिए जमानत प्रस्तुत करना जरूरी है। जब तक जमानत प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक रिहाई संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह न्यायालयीन प्रक्रिया है। आंदोलनकारियों की यह मांग आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में प्रभावित किसानों को उचित और पारदर्शी मुआवजा दिया जाना, जमीन की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करना, विस्थापित परिवारों के लिए व्यवस्थित पुनर्वास की व्यवस्था करना, परियोजना का काम स्थानीय लोगों की सहमति से आगे बढ़ाना और गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की जल्द रिहाई शामिल है।



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