RBI की रिपोर्ट से खुली MP की असली आर्थिक तस्वीर,देश के कुल कर्ज़ का 5% अकेले मध्यप्रदेश पर!

RBI की रिपोर्ट से खुली MP की असली आर्थिक तस्वीर,देश के कुल कर्ज़ का 5% अकेले मध्यप्रदेश पर!


MP NEWS: मध्यप्रदेश की वित्तीय हालत को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कुल सार्वजनिक कर्ज़ का 5 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश पर है. मार्च 2026 तक के बजट अनुमानों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की कुल देनदारी जहां 1,04,27,920.8 करोड़ रुपये है, वहीं इसमें से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 5,31,012.8 करोड़ रुपये हो चुकी है.

20 साल में 10 गुना बढ़ा राज्य का कर्ज़
रिपोर्ट का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि बीते एक साल में बढ़ा कर्ज़, उस कुल कर्ज़ से भी ज्यादा है, जो राज्य पर 20 साल पहले था. साल 2007 में मध्यप्रदेश की कुल देनदारी 52,731.1 करोड़ रुपये थी, जो अब 2026 में बढ़कर 5.31 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है. यानी करीब 20 साल में राज्य का कर्ज़ दस गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है. सिर्फ पिछले एक साल में ही देनदारी में करीब 50 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है.

एक साल में 50 हजार करोड़ रुपये की छलांग
RBI के बजट अनुमान 2025 में एमपी की देनदारी 4,80,976 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन मार्च 2026 तक यह बढ़कर 5,31,012.8 करोड़ रुपये पहुंच गई. यानी सिर्फ एक साल में कर्ज़ में 50,036.8 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो किसी भी राज्य के लिए चिंता की बड़ी वजह मानी जा रही है.

कर्ज़ में एमपी देश में नौवें नंबर पर
देशभर के राज्यों की तुलना करें तो मध्यप्रदेश इस वक्त कर्ज़ के मामले में नौवें स्थान पर है. उससे आगे तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े राज्य हैं. हालांकि एमपी का कर्ज़ तेजी से बढ़ना विशेषज्ञों को आने वाले वर्षों की चिंता दिखा रहा है.

सरकार का तर्क, विकास के लिए ज़रूरी
राज्य सरकार का कहना है कि बढ़ता कर्ज़ बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के लिए जरूरी है. सरकार हर बार केंद्र से कर्ज़ लेते वक्त गजट नोटिफिकेशन में यह भी कहती है कि राज्य की भौतिक संपत्तियों का मूल्य उसकी कुल देनदारी से कहीं अधिक है, भले ही इसका कोई आधिकारिक आकलन न किया गया हो.

लाड़ली बहना योजना बनी सबसे बड़ा बोझ
राज्य के खजाने पर सबसे बड़ा भार मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का है. इस योजना पर अब हर महीने करीब 1850 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जो पहले 1540 करोड़ रुपये था. सरकार पहले ही ऐलान कर चुकी है कि 2028 तक इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. मुख्यमंत्री द्वारा भविष्य में इसे 5000 रुपये तक बढ़ाने की बात भी कही गई है, हालांकि इसकी समय-सीमा तय नहीं है.

कर्ज़ की एक सीमा भी तय
अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार की योजनाओं में राज्य को अपनी हिस्सेदारी देने के लिए भी भारी रकम की जरूरत होती है. हर कर्ज़ के लिए केंद्र की मंजूरी ली जाती है और एक सीमा तय की गई है, जिसके पार राज्य और उधार नहीं ले सकता.



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