रीवा के स्कूल शिक्षा विभाग में मरम्मत और रंगाई-पुताई के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। आरोप है कि कई स्कूलों में काम अधूरा रहा, कुछ में शुरू ही नहीं हुआ, लेकिन कागजों में फर्जी बिल और पूर्णता प्रमाण पत्र लगाकर 28 लाख 38 हजार 229 रुपए का भुगतान कर दिया गया। मामले में संभाग आयुक्त ने शनिवार को सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सहित कुल 6 अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूलों के कायाकल्प के लिए रीवा जिले को 55 लाख रुपए आवंटित किए थे। आरोप है कि 20 सितंबर 2025 को तत्कालीन डीईओ ने बिना भौतिक सत्यापन कराए ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी को 28 लाख से अधिक की राशि जारी कर दी। बाद की जांच में पाया गया कि जिन स्कूलों में कार्य पूर्ण बताया गया, वहां वास्तविक स्थिति कागजों से मेल नहीं खाती। स्कूलों में मरम्मत कार्य अधूरा मिला था
कमिश्नर तक शिकायत पहुंचने के बाद जेडी (ज्वाइंट डायरेक्टर) स्तर पर विशेष जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि कई स्कूलों में मरम्मत कार्य अधूरा मिला।
कुछ स्थानों पर रंगाई-पुताई और निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ।
इसके बावजूद पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर भुगतान किया गया। दस्तावेजों में गड़बड़ी और माप पुस्तिका (एमबी) में भी विसंगतियां पाई गईं। ये स्कूल जांच के दायरे में
जांच में जिन स्कूलों के नाम सामने आए, उनमें शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पयपखरा, हाई स्कूल दुआरी, पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल गुढ़, हायर सेकेंडरी स्कूल खैरा, हाई स्कूल बरैया और हाई स्कूल कन्या खटखटी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर तत्कालीन डीईओ सहित 6 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब संतोषजनक न मिलने पर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
Source link