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Shivpuri News: शिवपुरी जिले की लुकवासा ग्राम पंचायत एक नया उदाहरण बनकर उभरी है. पंचायत ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत नाडेप कम्पोस्ट टांके बनवाए हैं, जिनमें गोबर और फसल अवशेष से शुद्ध देसी जैविक खाद तैयार की जा रही है. पहले जहां गांव में कचरा फैला रहता था, अब उसे निर्धारित स्थान पर एकत्र कर खाद में बदला जा रहा है. इस पहल से गांव साफ हुआ है और किसानों को कम लागत में उर्वरक खाद मिल रही है. पंचायत की यह योजना कमाल कर रही है.
Shivpuri News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से करीब 35 किलोमीटर दूर कोलारस तहसील अंतर्गत आने वाली लुकवासा ग्राम पंचायत स्वच्छता और नवाचार का उदाहरण बनकर उभरी है. पंचायत ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए ग्रामीणों के लिए नाडेप (NADEP) कम्पोस्ट टांके तैयार कराए हैं.
इन नाडेप टांकों के माध्यम से गांव में स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. पहले जहां सड़कों पर आवारा कचरा फैला रहता था, अब उसे निर्धारित स्थान पर एकत्र कर नाडेप गड्ढों में डाला जाता है. इतना ही नहीं, जिन ग्रामीणों के पास पशुधन है वे भी अपने पशुओं का गोबर इसी स्थान पर डालते हैं, जिससे जैविक खाद तैयार की जाती है. इस पहल से गांव में गंदगी कम हुई है और पर्यावरण भी स्वच्छ बना है. साथ ही, तैयार होने वाली देसी खाद किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है, जिससे खेती की लागत घट रही है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है. पंचायत की यह पहल विकास और स्वच्छता का सफल मॉडल बन गई है.
क्या बोले ग्रामीण?
कुछ ही समय बाद यहां पर तीसरी शुद्ध देसी खाद बनकर तैयार हो जाती है. बताया जाता है कि यह जैविक खाद भूमि की उर्वरक शक्ति को बढ़ाती है और रासायनिक खाद की अपेक्षा अधिक गुणकारी सिद्ध होती है. इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है, नमी धारण क्षमता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है. ग्रामीणों के लिए यह देसी खाद गोबर और कृषि अवशेषों से यहीं तैयार की जाती है, जिससे लागत भी कम आती है. ग्रामीणों का कहना है कि इसी पंचवर्षीय कार्यकाल में उनकी पंचायत में कई विकास कार्य हुए हैं, जिनसे खेती और आजीविका दोनों को मजबूती मिली है.
पंचायत में नाडेप बनाने की योजना लागत
पंचायत स्तर पर नाडेप (NADEP) कम्पोस्ट टांका बनाने की योजना ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जाती है. इस योजना के तहत एक नाडेप टांका बनाने की अनुमानित लागत लगभग ₹10,000 से ₹18,000 या उससे अधिक हो सकती है, जो आकार, सामग्री और मजदूरी पर निर्भर करती है. टांका आमतौर पर ईंट, सीमेंट और जाली से बनाया जाता है. इसमें गोबर, फसल अवशेष और मिट्टी की परतें भरकर जैविक खाद तैयार की जाती है.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें