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Agriculture News: बालाघाट के स्मार्ट किसान हरिश सुलखे ने अपने केले के खेत में इंटरक्रॉपिंग की है. उन्होंने केले के पौधों के बीच शेष स्थान पर गेंदा फूलों की खेती की है. वह इससे एक्सट्रा इनकम ले रहे हैं. वह साल में दो बार गेंदे की फसल से कमाई करते हैं. सालभर में वह एक ही खेत से केले की एक बार, तो फूलों की दो बार उपज लेते हैं.
बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट को यूं तो धान की खेती के लिए जाना जाता है लेकिन अब यहां पर खेती में नवाचार हो रहे हैं. कोई सब्जियों की खेती कर रहा है, तो कोई बागवानी कर रहा है. इससे किसान पारंपरिक खेती के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमा रहे है. एक ऐसे ही किसान हैं, जो कभी पेशे से शिक्षक रहे हैं. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सरकारी योजना की मदद से केले की खेती शुरू की. इसी में वह इंटरक्रॉपिंग भी कर रहे हैं, यानी कि एक ही खेत में दो फसलें लगा रहे हैं. उन्नत किसान हरीश सुलखे ने लोकल 18 से आधुनिक खेती के अनुभव साझा किए हैं. वह बताते हैं कि इस तरह की खेती के लिए भूमि की तैयारी बेहद जरूरी है. ऐसे में पहले खेत में गहरी जुताई करें, फिर पाटा चलाकर भूमि को समतल करें. इसमें गोबर खाद अच्छी तरह मिला लें. केले की खेती के लिए जल निकासी बेहद जरूरी है. ऐसे में खेत में जलभराव से बचने के लिए उचित नालियां बनाएं.
रोग-कीट से बचाव का उपाय
हरिश सुलखे आगे बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के सलाहकार समय-समय पर फील्ड विजिट करते हैं. वह खेत में निगरानी के बाद उचित सलाह देते हैं और रोग और कीट से फसल को बचाते हैं. इसके अलावा उन्होंने अपने खेत में लाइट ट्रैप सहित कई देसी उपाय भी किए हैं. वहीं खेत में फूल की खेती से कीट सीधे मुख्य फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.
बालाघाट के स्मार्ट किसान हरिश सुलखे ने अपने केले के खेत में इंटरक्रॉपिंग भी शुरू की है. उन्होंने केले के पौधों के बीच बचे स्थान पर गेंदे के फूलों की खेती भी की है. वह इससे भी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं. बता दें कि वह एक साल में दो बार गेंदे की फसल लेते हैं. ऐसे में सालभर में वह एक ही खेत में केले की एक बार, तो फूलों की दो बार उपज लेते हैं.
एग्रीकल्चर टूरिज्म को दे रहे बढ़ावा
हरिश सुल्खे बताते हैं कि उनके फार्म हाउस को देखने के लिए किसान भाई दूर-दूर से आते हैं. वे उनसे खेती के आधुनिक तरीके सीख रहे हैं. वहीं उन्हें देखकर कई किसानों ने अपने खेती का तरीका भी बदला है. उनका फार्महाउस एक तरह से एग्रीकल्चर टूरिज्म को बढ़ावा दे रहा है. ऐसे में वह स्मार्ट किसान के साथ-साथ इलाके में एक रोल मॉडल भी बनकर उभरे हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.