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बालाघाट की यह कहानी रोहित की है, जो कभी शहर का चर्चित फोटोग्राफर हुआ करता था, लेकिन कोरोना लॉकडाउन ने सब कुछ बदल दिया. मजबूरी में रोहित को कैमरे बेचकर कर्ज चुकाना पड़ा और फोटोग्राफी को अलविदा कहना पड़ा. आज वह सुबह डिलीवरी बॉय का काम करता है और शाम को अंडे और एग रोल बेचकर परिवार का पालन-पोषण कर रहा है.
Balaghat News: आज कहानी है रोहित की, जिसके हाथ में कभी महंगा कैमरा हुआ करता था. अपने हाथों से कैमरे में दुनिया भर की तस्वीरों को कैद करता था. लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि अब उन्हीं हाथों में चम्मच आ गए. यह कहानी हारी हुई जिंदगी नहीं बल्कि हालातों को बदलने की है. जो सालों तक एक प्रोफेशन के लिए दिन रात जागता था. अब वह प्रोफेशन को भूला परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा लिया है. जानिए कभी फोटोग्राफर रहे रोहित के संघर्षों की कहानी…
बात साल 2007 की है, जब रोहित अपनी टीन एज में था. बचपन से शौक था कैमरा चलाना और अच्छी तस्वीरें खींचना. परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी ठीक न थी कि पिताजी अपने बालक को महंगा कैमरा चलाना सीखा सके. ऐसे में रोहित ने फोटोग्राफी सीखने के लिए नामी स्टूडियो में काम भी किया. फोटोग्राफी कोई पेशा नहीं बल्कि जुनून था. हर वक्त सिर्फ फोटोग्राफी की बाते और दिन रात वहीं काम. धीरे-धीरे फोटोग्राफी का मास्टर बन गया और शहर भर में हर जगह रोहित की डिमांड रहने लगी.
सालों की मेहनत और फिर शुरू हुआ खुद का काम
रोहित 12 साल तक कड़ी मेहनत करता रहा. आँखों में सिर्फ एक सपना था कि खुद का स्टूडियो खोला जाए. इसके लिए वह दिन रात मेहनत करता और छोटी-छोटी पूंजी जमा करता था. एक समय बाद सालों से बचाए पैसे और कर्ज लेने के बाद अपना सालों पुराना सपना पूरा किया. लेकिन किस्मत को ये नामंजूर था. कोरोना आ गया और काम ठप पड़ने लगा. लॉकडाउन में शादियां होना कम हुईं और इवेंट बंद हुए. ऐसे में लाखों रुपए खर्च कर बनाया स्टूडियो पर ताला पड़ गया.
लॉकडाउन और कर्ज की मार
नया-नया शुरू हुआ स्टूडियो कोरोना की वजह से बंद होने की कगार पर आया. ऐसे में समस्या ये हुई कि काम-धंधा ठप पड़ गया. फिर क्या लेनदारों का भी फोन पर फोन आने लगा. ऐसे में रोहित की मजबूरी बन गई. ऐसे में वह कभी सब्जियों का धंधा करता तो कभी कुछ. इतना कि कोरोना काल में रोजी रोटी के चलते पुलिस स्टेशन भी जाना पड़ा. आखिरकार इतने तनाव के बाद उन्होंने अपना कर्ज लेकर खरीदा हुआ सामान भी बेच दिया और कर्ज चुकाया और फोटोग्राफी को भी अलविदा कह दिया. इसके पीछे वह वजह बताते हैं कि लाखों के कैमरे खरीदते हैं और दूसरे लोग लाखों के काम के महज चंद हजार रुपए लेते हैं. वहीं, ग्राहक भी काम तो करवा लेते हैं लेकिन वह पैसे नहीं देते हैं.
गम को भुलाया और शुरू की नई शुरुआत
रोहित के लिए फोटोग्राफी छोड़ना इतना आसान न था, जिस सपने को लेकर दिन रात जिया और हासिल होते सपने को छोड़ना काफी मुश्किल था. ऐसे में रोहित ने फिर भी ये कदम उठाया. लेकिन रोहित उदास न हुआ और दूसरा काम कर परिवार का पालन पोषण कर रहा है. सुबह के वक्त बतौर डिलीवरी बॉय का काम करता है, तो शाम को देर रात तक अंडे और एग रोल सहित गुमटी लगाता है. ऐसे में अब पहले से ज्यादा और अच्छी कमाई तो रही है. लेकिन रात में अपने पैशन के लिए काम करता है.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें