दतिया जिला अस्पताल में मंगलवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.के. वर्मा ने ट्रॉमा सेंटर और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इलाज की व्यवस्थाओं, ड्यूटी सिस्टम और आपात सेवाओं की वास्तविक स्थिति सामने आई, जिस पर उन्होंने मौके पर ही जरूरी सुधार के संकेत दिए। डॉ. वर्मा ने सबसे पहले ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर वहां मरीजों को मिल रही सुविधाओं, स्टाफ की तैनाती और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को देखा। उन्होंने यह साफ किया कि गंभीर मरीजों के इलाज में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए और हर स्थिति में त्वरित उपचार सुनिश्चित किया जाए। कोल्ड-चेन व्यवस्था की समीक्षा
इसके बाद वे टीकाकरण कक्ष पहुंचे। जहां वैक्सीनेशन की प्रगति और कोल्ड-चेन व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की गई। साथ ही एएनसी-पीएनसी वार्ड में गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को दी जा रही सेवाओं की स्थिति जानी। एएनसी रजिस्ट्रेशन से जुड़े रिकॉर्ड भी देखे गए और उन्हें और अधिक व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. श्वेता यादव के साथ एमसीएच सेवाओं को लेकर लंबी चर्चा हुई। इस दौरान मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, जटिल मामलों के बेहतर प्रबंधन और संस्थागत प्रसव की स्थिति पर विस्तार से मंथन किया गया। डॉ. वर्मा ने स्पष्ट किया कि एमसीएच सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए व्यवस्थागत सुधार जरूरी हैं। सुविधाओं में इजाफा करने पर जोर
उन्होंने संबंधित विभागों के प्रभारियों से मरीजों की सुविधा, स्वच्छता और समन्वय पर भी चर्चा की। निरीक्षण के अंत में डॉ. वर्मा ने कहा कि ट्रॉमा और एमसीएच सेवाएं आम लोगों के लिए जीवन रेखा हैं, इन्हें अधिक सुव्यवस्थित, प्रभावी और संवेदनशील बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए। अस्पताल में हुए इस औचक निरीक्षण को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिलने की उम्मीद है।
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