Bihar Cricket: बिहार क्रिकेट टीम ने हाल के समय में जोरदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय घरेलू सर्किट में अपनी एक अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है. रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी के प्लेट से एलीट ग्रुप में प्रमोशन ने इस बात पर मुहर लगाया है. यहां तक कि महिला टीम ने भी जोरदार खेल दिखाते हुए सीनियर वुमेंस वनडे ट्रॉफी प्लेट ग्रुप फाइनल 2025-26 को जीत लिया. सिक्किम को कटक में टीम 7 विकेट से हराकर चैंपियन बनी. इन सफलताओं ने बिहार क्रिकेट को एक बार फिर से चर्चा में ला दिया है.
बिहार में फिर से आगे बढ़ रहा क्रिकेट
एक समय था जब बिहार क्रिकेट संघ (BCA) का वजूद लगभग खत्म हो गया था और खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन हालिया प्रदर्शन ने इस धारणा को बदल दिया है. बिहार में प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के कमी के कारण प्लेयर दूसरे राज्यों में जाते थे. अब ऐसा नहीं हो रहा है और बिहार हर टूर्नामेंट में लगातार जीत रहा है. उसकी सफलता के पीछे खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशासकों की भूमिका भी काफी ज्यादा रही. अक्सर क्रिकेटरों की तारीफ होती है और प्रशासक पर्दे के पीछे रह जाते हैं.
छह साल के कार्यकाल में बदली बीसीए की काया
प्रशासनिक तौर पर देखें तो बिहार क्रिकेट को हाल के 6-7 सालों में बदलने का श्रेय पूर्व प्रेसिडेंट राकेश तिवारी को जाता है. वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार क्रिकेट फिर से वजूद में आया और 2019 में राकेश तिवारी बीसीए अध्यक्ष बने. उनके छह साल के कार्यकाल में बिहार की रणजी टीम पहली बार एलीट ग्रुप में पहुंची और अंडर-23 टीम ने भी सीके नायुडू ट्रॉफी प्लेट ग्रुप जीतकर एलीट ग्रुप में जगह पक्की की. वर्तमान में उनके पुत्र हर्षवर्धन तिवारी बीसीए के अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं.
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वैभव सूर्यवंशी ने ऊंचा किया नाम
बिहार क्रिकेट ने लंबे समय बाद एक सितारे को दिया है. 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ राज्य के नहीं, बल्कि देश के बड़े खिलाड़ी बन गए हैं. आईपीएल में धमाल मचाने के बाद उन्हें अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी इतिहास रच दिया. वैभव ने फाइनल में जोरदार शतक लगाकर टीम इंडिया को चैंपियन बनाया. वैभव को आगे बढ़ाने में भी राकेश तिवारी का बड़ा योगदान है और यह खुद बाएं हाथ का बल्लेबाज भी स्वीकार करता है. यहां तक कि वैभव के पिताजी ने भी कई बार अलग-अलग इंटरव्यू में उनकी तारीफ की है.
आलोचकों का किया सामना
राकेश तिवारी से जब बिहार क्रिकेट के विकास के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पहले बहुत सारे ऐसे लोग थे जो बस बाधाएं लाकर खुश हो जाते थे. उनके पास क्रिकेट को आगे बढ़ाने का प्लान नहीं था और वे लगातार बिहार क्रिकेट को बदनाम करते थे. परिवारवाद और भ्रष्टाचार का बोलबाला था. बिहार में क्रिकेट को सुधारने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. वह बिहार बीजेपी के कोषाध्यक्ष भी हैं और इससे सरकार का सपोर्ट भी बिहार क्रिकेट को उनके जरिए मिलता रहा है.
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चयन प्रक्रिया में अब पारदर्शिता
राकेश तिवारी बताते हैं कि एक दौर वह भी था जब बिहार में खेल सुविधाएं लगभग शून्य थीं, लेकिन आज स्थिति काफी अलग है. राज्य के पास अब दो बड़े और आधुनिक स्टेडियम हैं, जो खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बेहतर माहौल प्रदान कर रहे हैं. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के विकास ने यह सुनिश्चित किया है कि बिहार के लड़कों को अब झारखंड या अन्य राज्यों का रुख न करना पड़े. यदि इसी निष्पक्षता से चयन जारी रहा, तो बिहार जल्द ही भारतीय क्रिकेट को और भी कई बड़े सितारे देगा.