कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली वन परिक्षेत्र में बाघ के हमले में एक नर तेंदुए की मौत हो गई। गुरुवार को बीट लांघादादर के कक्ष क्रमांक 632 के पास गश्ती दल को तेंदुए का शव मिला। बाघ की मौजूदगी के मिले साक्ष्य घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंची। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत डॉग स्क्वॉड की मदद से पूरे इलाके की सघन तलाशी ली गई। जांच के दौरान घटनास्थल के आसपास बाघ के पदचिह्न और अन्य साक्ष्य मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि यहां बाघ और तेंदुए के बीच संघर्ष हुआ था। पोस्टमार्टम में हुई पुष्टि तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल और उनकी टीम द्वारा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, तेंदुए के सिर पर बाघ के दांतों के गहरे निशान पाए गए हैं, जो उसकी मृत्यु का मुख्य कारण बने। शव के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शिकार या किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। नियमों के तहत किया अंतिम संस्कार पोस्टमार्टम के बाद एनटीसीए प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में निर्धारित प्रक्रिया के तहत तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह वन्यजीवों के बीच होने वाला एक प्राकृतिक संघर्ष है, जो अक्सर क्षेत्र के वर्चस्व को लेकर होता है।
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