खजुराहो नृत्य महोत्सव के पहले दिन जोरदार हंगामा, किस बात पर बुरी तरह भड़क गए विदेशी सैलानी?

खजुराहो नृत्य महोत्सव के पहले दिन जोरदार हंगामा, किस बात पर बुरी तरह भड़क गए विदेशी सैलानी?


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खजुराहो नृत्य महोत्सव के भव्य आयोजन में पहले ही दिन हुए घटनाक्रम ने व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दूर-दराज से आए पर्यटक कला देखने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे, जबकि मंच से सियासी भाषणों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था.

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खजुराहो नृत्य महोत्सव

विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव का आगाज हो चुका है, लेकिन पहले ही दिन महोत्सव के मंच पर एक ऐसी स्थिति बनी जिसने सबको हैरान कर दिया. 20 से 26 फरवरी तक चलने वाले इस उत्सव के शुभारंभ अवसर पर जब प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भाषण देने खड़े हुए, तो दर्शक दीर्घा में बैठे विदेशी पर्यटकों का धैर्य जवाब दे गया. दरअसल, कार्यक्रम शुरू होने का समय शाम 6:30 बजे तय था, लेकिन मुख्य अतिथि और मंत्रियों के देरी से पहुंचने के कारण समारोह करीब 2 घंटे की देरी से शुरू हुआ.

लंबे भाषणों ने तोड़ा दर्शकों के सब्र का बांध
इस बीच मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने करीब 16 मिनट तक अपना संबोधन दिया और सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने भी 3 मिनट तक अपनी बात रखी. लेकिन जब संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का भाषण शुरू हुआ, तो दर्शक बुरी तरह भड़क गए. पर्यटकों को कला और नृत्य का इंतजार था, लेकिन नेताओं के लंबे भाषणों ने उनके सब्र का बांध तोड़ दिया. देखते ही देखते सामने बैठी भीड़ ‘गो बैक’ के नारे लगाने लगी और चारों तरफ से ‘हो-हो’ का शोर सुनाई देने लगा.

बिना कविता सुनाए मंच से नीचे नहीं उतरे मंत्री
हैरानी की बात यह रही कि इतनी भारी हूटिंग के बावजूद मंत्री जी अपना भाषण देते रहे. वे करीब 6 मिनट तक बोले और अंत में जब शोर और बढ़ा, तो वे चार पंक्तियां सुनाने की जिद पर अड़ गए और भारत माता की जय के नारे लगाने लगे. दर्शकों की पीड़ा समझते हुए उन्होंने मंच से यह तो स्वीकार किया कि लोग कार्यक्रम देखने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन फिर भी बिना अपनी कविता सुनाए और जयकारे लगवाए वे मंच से नीचे नहीं उतरे.

विदेशी सैलानियों ने जाहिर की नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम पर वहां मौजूद विदेशी सैलानियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की. इटली के फ्लोरेंस से आए एलेसांद्रो ने कहा कि हम इटली में माहौल को महसूस करने और नृत्य देखने के आदी हैं, न कि लंबे भाषण सुनने के. हम अनुभव को जीना चाहते थे. लेकिन मंत्री जी ने शायद कुछ ज्यादा ही बातें कर दीं. हम वास्तव में केवल नृत्य देखना चाहते थे.



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