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Black Onion Cultivation: निमाड़ क्षेत्र के किसान पहले से ही प्याज की खेती में अनुभवी हैं, इसलिए वे आसानी से काले प्याज की खेती शुरू कर सकते हैं. कम उत्पादन में भी ज्यादा कीमत मिलने के कारण यह खेती किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है.
Khandwa News: मध्य प्रदेश का खंडवा जिला प्याज उत्पादन के लिए पहले से ही पहचान बना चुका है. यहां के किसान वर्षों से लाल और गुलाबी प्याज की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब काले प्याज की खेती भी किसानों के लिए मुनाफे का नया विकल्प बन रही है. बाजार में इस प्याज की मांग ज्यादा है और खास बात ये कि इसका उपयोग देश के साथ-साथ विदेशों में भी किया जाता है, जिससे किसानों को सामान्य प्याज की तुलना में बेहतर दाम मिलते हैं.
काले प्याज की खासियत
काला प्याज दिखने में गहरे बैंगनी या काले रंग का होता है. इसका स्वाद तेज होता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टोरेज क्षमता है. जहां सामान्य प्याज ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रह पाता, वहीं काले प्याज को जून से अक्टूबर तक आसानी से स्टोर किया जा सकता है. इससे किसान अपनी फसल को अच्छे भाव मिलने पर बेचकर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.
खेती के लिए चाहिए ऐसी मिट्टी
काले प्याज की खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए और खेत में पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है. इसकी खेती के लिए ठंडी और समशीतोष्ण जलवायु बेहतर रहती है. निमाड़ और खंडवा क्षेत्र का मौसम इस फसल के लिए अनुकूल माना जाता है.
बुवाई और रोपाई का सही समय
किसान अक्टूबर-नवंबर में इसकी नर्सरी तैयार कर सकते हैं और दिसंबर से जनवरी के बीच पौध की रोपाई कर सकते हैं. एक हेक्टेयर के लिए लगभग 8 से 10 किलो बीज पर्याप्त होता है, जबकि एक एकड़ में करीब 3 से 3.5 किलो बीज लगता है. पौध से पौध की दूरी 8 से 10 सेमी और कतार से कतार की दूरी 15 सेमी रखना बेहतर होता है.
सिंचाई, खाद और देखभाल
रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना जरूरी होता है. इसके बाद 7 से 10 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए. खेत में 20 से 25 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालना लाभदायक होता है. नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करने से उत्पादन अच्छा मिलता है. समय-समय पर कीट और रोग नियंत्रण करना भी जरूरी है.
फसल 100 से 120 दिन में तैयार
काले प्याज की फसल लगभग 100 से 120 दिन में तैयार हो जाती है. जब पत्तियां पीली होकर गिरने लगें, तब इसकी खुदाई करनी चाहिए. एक हेक्टेयर से 250 से 350 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. हालांकि, इसका उत्पादन लाल प्याज से थोड़ा कम होता है, लेकिन बाजार में इसका भाव ज्यादा होने से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.
एक्सपर्ट की सलाह
जय किसान कृषि क्लिनिक के कृषि विशेषज्ञ सुनील पटेल के अनुसार, काले प्याज की खेती लाल प्याज की तरह ही की जाती है, लेकिन इसकी कीमत ज्यादा मिलती है. इसकी स्टोरेज क्षमता ज्यादा होने से किसान इसे लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और सही समय पर बेच सकते हैं. विदेशों में इसकी मांग होने के कारण किसानों के लिए यह बेहतर कमाई का विकल्प बन सकता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें