छिंदवाड़ा शहर में कांग्रेस और भाजपा के बीच पुतला दहन को लेकर हुआ टकराव रविवार को पूरे शहर में तनाव का कारण बन गया। प्रशासन को पहले से विवाद की आशंका थी, इसलिए तीन स्तर की बैरिकेडिंग के साथ लगभग 150 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शन उग्र हो गया और भाजपा कार्यकर्ता तीनों सुरक्षा घेरों को तोड़ते हुए कांग्रेस कार्यालय तक पहुंच गए। धक्का-मुक्की के दौरान कोतवाली निरीक्षक आशीष कुमार जमीन पर गिर पड़े, जबकि कुंडीपुरा थाना प्रभारी महेंद्र भगत ने खुद को संभाला। बाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोतवाली का घेराव कर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया। अंततः एडीएम के हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रित हुई।
इंदिरा तिराहा बना पहला टकराव स्थल
पहली सुरक्षा लेयर इंदिरा तिराहा पर लगाई गई थी, जहां कोतवाली और कुंडीपुरा थाना पुलिस के साथ एसडीएम सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ने पर अड़े रहे। अधिकारियों ने उन्हें वैकल्पिक मार्ग से जाकर पुतला दहन करने की सलाह दी, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। नारेबाजी के बीच भीड़ ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसी दौरान अफरा-तफरी में कोतवाली निरीक्षक आशीष कुमार गिर पड़े, हालांकि वे तुरंत उठकर व्यवस्था संभालने लगे। फव्वारा चौक पर दूसरी बैरिकेडिंग भी टूटी
पहला घेरा टूटने के बाद भीड़ फव्वारा चौक पहुंची, जहां दूसरी सुरक्षा लेयर लगाई गई थी। यहां भी पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन संख्या अधिक होने के कारण बैरिकेडिंग गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस समय पर्याप्त पुलिस बल सक्रिय नजर नहीं आया, जिससे स्थिति कुछ देर के लिए नियंत्रण से बाहर होती दिखी। कांग्रेस कार्यालय के सामने झड़प
तीसरी और अंतिम बैरिकेडिंग कांग्रेस कार्यालय के सामने की गई थी। यहां पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। बैरिकेडिंग को धक्का देकर गिरा दिया गया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष शेष राव यादव और भाजपा उपाध्यक्ष अजय सक्सेना की पुलिसकर्मियों से बहस होती नजर आई। माहौल कुछ समय के लिए अत्यंत तनावपूर्ण हो गया। दोनों दलों ने किया पुतला दहन
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी का पुतला उसी आग में डालकर जला दिया। फायर ब्रिगेड समय पर सक्रिय नहीं हो सकी, जिससे पुलिस को आग बुझाने के लिए सिलेंडर पाउडर का इस्तेमाल करना पड़ा। इससे कुछ समय के लिए और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और नेताओं में कहासुनी
पुतला दहन के बाद आग बुझाने को लेकर भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष नवीन बारस्कर और कुछ युवा नेताओं की पुलिस से बहस हुई। चौकी प्रभारी अविनाश पारधी ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। फायर ब्रिगेड संचालन को लेकर आरआई आशीष तिवारी और नगर निगम कर्मचारियों के बीच भी विवाद हुआ, जो बाद में आपसी सहमति से सुलझ गया।
कांग्रेस का आरोप, सड़क पर किया प्राथमिक उपचार
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया और दो कार्यकर्ताओं के घायल होने की बात कही। घायलों को सड़क पर ही लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस का झंडा ओढ़ रखा था।
150 पुलिसकर्मी तैनात, रणनीति पर उठे सवाल
एडीएम धीरेंद्र सिंह के अनुसार, करीब 150 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। हालांकि, स्थिति बिगड़ने पर कुछ ही अधिकारी सक्रिय रूप से हालात संभालते नजर आए। कई पुलिसकर्मी दूरी बनाकर खड़े दिखे, जिससे भीड़ आगे बढ़ने में सफल रही। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की तैयारी और रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
दो घंटे तक कोतवाली का घेराव
झड़प और पुतला दहन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोतवाली का घेराव कर दिया। मुख्य द्वार बंद कर धरने पर बैठ गए और कार्रवाई की मांग की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने समझाइश दी, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा। करीब दो घंटे बाद एडीएम के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और स्थिति सामान्य हुई।
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