पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने सोशल मीडिया पर लिखा था: “उनमें युवराज सिंह जैसी बात दिखती है. इंडिया को वो ओपनर मिल गया है जो पहली बॉल से मैच पलट सकता है.”
पूर्व वेस्टइंडीज प्लेयर ब्रायन लारा ने उन्हें रनों का भूखा बताया था. उनके अलावा और भी कई ऐसे क्रिकेटर थे, जिन्होंने उनकी जमकर तारीफ की थी. उनके मेंटोर युवराज सिंह भी उनके बारे में कुछ न कुछ लिखते या कहते थे. तब उनका पहली बॉल से छक्का मारने का तरीका सबको ‘बहादुरी’ लगता था. किसी ने नहीं सोचा था कि यही स्टाइल उनके लिए मुसीबत बन जाएगा.
वो 4 पारियां, जिसने सारा गेम बिगाड़ दिया
कहते हैं जब आप रन बनाते हैं तो आपकी कमियां छुप जाती हैं, लेकिन जैसे ही आप फेल होते हैं, सब गलतियां निकालने लगते हैं. टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज से लेकर अब तक, पिछली 4 पारियों में अभिषेक का बल्ला एकदम खामोश रहा है.
अभिषेक की पिछली 4 पारियों का स्कोर:
बनाम नीदरलैंड: 0 रन
बनाम पाकिस्तान: 0 रन
बनाम यूएसए: 0 रन
बनाम साउथ अफ्रीका (सुपर-8): 15 रन (12 गेंद)
ग्रुप स्टेज के शुरुआती तीन मैचों में लगातार जीरो पर आउट होना किसी भी प्लेयर का कॉन्फिडेंस हिला सकता है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 15 रन तो बनाए, लेकिन जब टीम को लंबी पारी की जरूरत थी, तब वो खराब शॉट खेलकर आउट हो गए.
वही एक्सपर्ट्स और अब बदली हुई बातें
जो लोग कल तक अभिषेक की तारीफों के पुल बांध रहे थे, आज वही उन्हें सही चीजें बताने की कोशिश कर रहे हैं. देखिए किसने क्या कहा:
पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा: “इंटरनेशनल क्रिकेट सिर्फ छक्के मारने का खेल नहीं है. अभिषेक को समझना होगा कि हर बॉल पर बल्ला घुमाना बहादुरी नहीं, बल्कि विकेट फेंकना है. उन्हें थोड़ा रुक कर खेलना सीखना होगा.”
आकाश चोपड़ा ने मैच एनालिसिस के दौरान कहा: “जो स्टाइल कल तक उनकी ताकत थी, आज वही कमजोरी बन गई है. साउथ अफ्रीका के बॉलर्स ने जान लिया है कि उन्हें कहां गेंद फेंकनी है. अब वो ‘फियरलेस’ नहीं, बल्कि ‘लापरवाह’ लग रहे हैं.”
माइकल वॉन ने क्रिकबज पर कहा: “अभिषेक के पास टैलेंट तो है, लेकिन बड़े मैचों में दिमाग से खेलना पड़ता है. फिलहाल वो हर बॉल को बाउंड्री के बाहर भेजने की जिद में अपना विकेट दे रहे हैं.”
हीरो से विलेन तक का सफर: क्या पुराना इतिहास दोहराया जा रहा है?
अभिषेक शर्मा के साथ जो हो रहा है, वो पहले भी कई खिलाड़ियों के साथ हो चुका है. पृथ्वी शॉ को भी शुरुआत में ‘अगला सचिन’ कहा गया था, लेकिन उनकी तकनीक की कमियां पकड़ में आईं और वो टीम से बाहर हो गए. संजू सैमसन भी शुरुआत में ऐसे ही ‘हिट या मिस’ वाले प्लेयर थे, जिससे उन्हें टीम में जगह पक्की करने में सालों लग गए. अभिषेक का गेम ‘हाई रिस्क’ वाला है. जिस दिन बॉल बाउंड्री के पार जाती है, वो मैच विनर बन जाते हैं और जिस दिन आउट होते हैं, लोग उन्हें गैर-जिम्मेदार कहने लगते हैं.
क्या अब वापसी का चांस है?
साउथ अफ्रीका से हार के बाद भारत के लिए अब हर मैच फाइनल जैसा है. अभिषेक के पास ज़िम्बाब्वे (26 फरवरी) और वेस्टइंडीज (1 मार्च) के खिलाफ दो मौके और हैं. अगर इन मैचों में उन्होंने समझदारी से रन नहीं बनाए, तो टीम में ऋतुराज गायकवाड़ या संजू सैमसन जैसे प्लेयर्स उनकी जगह के लिए तैयार बैठे हैं. अब अभिषेक को तय करना है कि उन्हें ‘अगला युवराज सिंह’ बनना है या फिर गुमनाम हो जाना है.