बहेलिया समाज की कहानी! रुद्राक्ष-केसर बेचती महिलाएं, इसी समाज से है मोनालिसा

बहेलिया समाज की कहानी! रुद्राक्ष-केसर बेचती महिलाएं, इसी समाज से है मोनालिसा


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Baheliya Samaj Story: करीब 10 साल से इस व्यापार से जुड़ी जंगीसा नामक महिला ने लोकल 18 से कहा कि उनका समूह नेपाल से रुद्राक्ष लेकर आता है. जंगीसा ने दावा किया कि लोग इसे आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ के लिए भी खरीदते हैं.

सतना. भीड़ भरे मेलों में सजी छोटी-छोटी दुकानों के बीच जब रंग-बिरंगी रुद्राक्ष मालाएं, केसर की डिब्बियां और शिलाजीत की पुड़िया नजर आती हैं, तो शायद ही कोई सोचता हो कि इनके पीछे एक पूरे समाज की सदियों पुरानी आजीविका जुड़ी है. बहेलिया समाज की महिलाएं वर्षों से देशभर के मेलों में अपना अस्थायी बाजार सजाकर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं. हाल के बड़े आयोजनों में इनकी मौजूदगी ने एक बार फिर इस पारंपरिक व्यापार को चर्चा में ला दिया था, खासकर तब जब इसी समाज की नीली आंखों वाली एक लड़की मोनालिसा रुद्राक्ष बेचते-बेचते लोकप्रियता हासिल कर मनोरंजन जगत तक पहुंच गई.

लोकल 18 से बातचीत में अटरिया से आई आदिवासी बहेलिया महिलाओं ने बताया कि यह कोई नया काम नहीं बल्कि उनके बाप-दादाओं के समय से चला आ रहा पारंपरिक व्यवसाय है. उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्ग भी यही धंधा करते करते गुजर गए, अब उनकी यही विरासत हम और हमारी आने वाली पीढ़ी संभाल रही है. वहीं एक महिला ने बताया कि देश के अलग-अलग राज्यों में बसे बहेलिया परिवार आज भी मुख्य रूप से रुद्राक्ष माला, केसर और शिलाजीत बेचकर ही जीवनयापन करते हैं. इन महिलाओं के लिए मेला सिर्फ व्यापार का स्थान नहीं बल्कि सामाजिक पहचान का मंच भी है. वे अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में पहुंचकर अपना छोटा सा बाजार सजाती हैं, जहां श्रद्धालु और आम लोग आस्था से जुड़ी वस्तुएं खरीदते हैं.

महाकुंभ से चर्चा में आई मोनालिसा
महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में बहेलिया समाज की मोनालिसा नाम की लड़की रुद्राक्ष बेचते हुए लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई थी. समाज की महिलाओं के मुताबिक, लोग पहले मजाक में कहते थे कि क्या करेगी, हीरोइन बनेगी लेकिन किस्मत ने करवट ली और आज वही लड़की फिल्मों और टीवी सीरियलों में काम कर रही है. उनके लिए यह उदाहरण अब इस समुदाय की अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुका है.

नेपाल से लाते हैं रुद्राक्ष
करीब 10 वर्षों से इस व्यापार से जुड़ी जंगीसा नामक महिला ने लोकल 18 को बताया कि उनका समूह नेपाल से रुद्राक्ष लेकर आता है. उनका दावा है कि लोग इसे आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ के लिए भी खरीदते हैं. उन्होंने कहा कि हृदय और शरीर से जुड़ी कई समस्याओं में लोग इसे लाभकारी मानते हैं.

गलत धारणाओं से जूझता समाज
बहेलिया समाज की महिलाओं ने यह भी कहा कि अक्सर उनके बारे में गलतफहमियां फैलाई जाती हैं. लोग हमें गलत नजर से देखते हैं जबकि हम कभी चोरी-चकारी नहीं करते. हम सिर्फ रुद्राक्ष, केसर और शिलाजीत बेचकर अपना गुजारा करते हैं. मेलों में सजी इन दुकानों के पीछे संघर्ष, परंपरा और आत्मसम्मान की लंबी कहानी छिपी है. बदलते समय में जहां पारंपरिक पेशे धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं, वहीं बहेलिया समाज की महिलाएं आज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं और उसी के सहारे भविष्य की राह तलाश रही हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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