ग्वालियर में हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की युगलपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पहले विवाह के विधिवत समाप्त हुए बिना दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता। काउंसलिंग के बाद युवती ने अपने माता-पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर याचिका का अंतिम निराकरण कर दिया। सुनवाई के दौरान युवती को थाना थाटीपुर कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। युवती की व्यक्तिगत उपस्थिति के कारण वीडियो प्रसारण रोक दिया गया और अदालत ने प्रत्यक्ष रूप से उसका पक्ष सुना। इससे पहले 19 फरवरी 2026 को अदालत ने शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी से युवती की काउंसलिंग कराने का अनुरोध किया था। यह निर्देश इसलिए दिया गया क्योंकि युवती का पहला विवाह अभी विधिवत समाप्त नहीं हुआ था। विधिक स्थिति समझाने के बाद लिया निर्णय काउंसलिंग रिपोर्ट में बताया गया कि युवती को उसकी कानूनी स्थिति से अवगत कराया गया। उसे बताया गया कि पहले विवाह के रहते दूसरा विवाह कानूनी रूप से वैध नहीं होता। इसके बाद युवती ने अपने माता-पिता के साथ रहकर आगे की पढ़ाई पूरी करने की सहमति दी। माता-पिता ने सम्मानपूर्वक रखने का दिया आश्वासन सुनवाई के दौरान युवती के माता-पिता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे अपनी बेटी को पूर्ण सम्मान और गरिमा के साथ रखेंगे। अदालत ने इस आश्वासन को अभिलेख पर लिया। युवती ने अदालत में स्पष्ट कहा कि उसका तलाक नहीं हुआ है, इसलिए वह अपने माता-पिता के साथ जाना चाहती है। काउंसलिंग रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अभिलेख पर रखा गया और याचिका का अंतिम निराकरण कर दिया गया।
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