राहुल गांधी का भोपाल दौरा: ट्रेड डील विरोध की रणनीति या कांग्रेस का ड्रामा?

राहुल गांधी का भोपाल दौरा: ट्रेड डील विरोध की रणनीति या कांग्रेस का ड्रामा?


भोपाल.  कांग्रेस ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील को लेकर एक नई जंग छेड़ दी है; इससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है. 24 फरवरी 2026 को भोपाल में आयोजित किसान महापंचायत को सिर्फ एक रैली नहीं माना जा रहा, बल्कि यह लोकसभा चुनावों से पहले किसान मुद्दे को फिर से गर्म करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे दोनों इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे, जो डील के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी. कांग्रेस का दावा है कि यह डील सोयाबीन, मक्का, कपास, फल और नट्स जैसे फसलों के किसानों को सीधा झटका देगी. सस्ते अमेरिकी आयात से भारतीय बाजारों में कीमतें गिरेंगी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग बेमानी हो जाएगी और लाखों किसान प्रभावित होंगे. खासतौर पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में जहां इन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है.

कांग्रेस इसे “किसानों से सौदेबाजी” और “ट्रैप डील” करार दे रही है, जो अमेरिकी दबाव में हस्ताक्षरित हुई. यह फैसला ऐसे समय में आया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ नीति को खारिज किया, जिससे भारत को बेहतर सौदा मिल सकता था, लेकिन सरकार ने जल्दबाजी की. यह महापंचायत कांग्रेस की ग्रामीण भारत में वापसी की कोशिश है, जहां 2024 चुनावों में किसान आंदोलन ने उन्हें नुकसान पहुंचाया था. इस विरोध की जड़ें गहरी हैं, क्योंकि ट्रेड डील ने किसानों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है. कांग्रेस का कहना है कि डील में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने का प्रावधान है, जिसमें डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGS), रेड सोरघम, ट्री नट्स, फ्रेश फ्रूट्स और सोयाबीन ऑयल शामिल हैं. इससे घरेलू कीमतें 10% तक गिर सकती हैं, जैसा कि सोयाबीन और मक्का के बाजारों में पहले ही देखा जा रहा है.

कांग्रेस ने “किसान न्याय” की लड़ाई तो भाजपा ने इसे पुराना ड्रामा कहा 
कांग्रेस की रणनीति भोपाल से शुरू होकर महाराष्ट्र के यवतमाल और राजस्थान तक फैलेगी, जहां किसान पहले से ही नकली बीज, मौसमी आपदाओं और MSP की कमी से जूझ रहे हैं. राहुल गांधी इसे “किसान न्याय” की लड़ाई बता रहे हैं, जो 2020-21 के किसान आंदोलन की याद दिलाती है. भाजपा इसे “पुराना ड्रामा” कहकर खारिज कर रही है, दावा कर रही कि डील किसानों के हितों की रक्षा करती है और अभी अंतिम रूप नहीं लिया गया. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील अमेरिकी दबाव का नतीजा है, जो भारत को जीएम फसलों के आयात के लिए मजबूर कर सकती है. इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा. कांग्रेस की यह कवायद ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत करने की है, जहां भाजपा का दबदबा है.

कांग्रेस की रणनीति: किसान एजेंडा को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना
कांग्रेस ने भोपाल को इसलिए चुना क्योंकि मध्य प्रदेश सोयाबीन उत्पादन का केंद्र है. यहां किसान पहले से ही कम दामों और आपदाओं से प्रभावित हैं. महापंचायत में राहुल गांधी MSP गारंटी कानून और डील रद्द करने की मांग करेंगे. यह 2029 चुनावों के लिए ग्रामीण भारत में सेंध लगाने की कोशिश है, जहां कांग्रेस 2024 में कमजोर रही. अगले चरण महाराष्ट्र और राजस्थान में होंगे, जहां समान मुद्दे हैं.  कांग्रेस का कहना है कि डील से सस्ते आयात बढ़ेंगे, जिससे सोयाबीन की कीमतें 10% और मक्का 4% गिर चुकी हैं. तेलंगाना, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मक्का किसान प्रभावित होंगे. जीएम फसलों का आयात स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाएगा.



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