सागर यूनिवर्सिटी में डिग्री, टीसी, माइग्रेशन लेना अब महंगा, तीन गुना तक बढ़ा दी गई फीस, स्टूडेंट्स नाराज

सागर यूनिवर्सिटी में डिग्री, टीसी, माइग्रेशन लेना अब महंगा, तीन गुना तक बढ़ा दी गई फीस, स्टूडेंट्स नाराज


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Sagar University Fees News: सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर में अब टीसी, माइग्रेशन और डिग्री जैसे जरूरी दस्तावेज लेना महंगा हो गया है. इनमें विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी की गई है. इससे छात्रों में नाराजगी है. जानें अब कितना देना होगा..

Sagar News: मध्य प्रदेश की एकमात्र डॉ. हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर में अब टीसी, माइग्रेशन और डिग्री जैसे जरूरी दस्तावेज लेना महंगा हो गया है. इनमें विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा फीस में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी की गई है. प्रशासनिक भवन में बढ़ाई गई फीस की सूची भी चस्पा की गई है, जिसके बाद से स्टूडेंटों में नाराजगी है. उनका कहना है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी होने के बावजूद छात्रों को समय पर सुविधाएं तो दी नहीं जा रहीं, बल्कि उल्टा इस तरह से फीस बढ़ाकर उन पर बोझ और भी ज्यादा डाला जा रहा है.

12 साल से विश्वविद्यालय में डिग्री के लिए 250 रुपये ही फीस ली जा रही थी, लेकिन अब 500 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं. इसके साथ स्थानांतरण प्रमाण पत्र में 100 रुपए खर्च आता है, जो अब तीन गुना बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया गया है. इसके अलावा डुप्लीकेट उपाधि, प्रमाण पत्र, डुप्लीकेट अंकसूची और नाम सुधार (अंकसूची एवं टीआर में सुधार) में भी फीस बढ़ा दी गई. इन सभी में करीब 50 प्रतिशत ज्यादा फीस बढ़ाने से विद्यार्थियों की आर्थिक परेशानी बढ़ गई है. इसको लेकर छात्रों में नाराजगी भी है.

NSUI करेगा विरोध
छात्र अंशुल शर्मा ने बताया, विश्वविद्यालय का यह रवैया तानाशाही भरा है. एक तरफ केरल राज्य में यूजी शिक्षा को फ्री किया जा रहा है तो दूसरी तरफ हमारा विश्वविद्यालय फीस पर फीस बढ़ा रहा है. आम छात्रों के हित में NSUI इसका विरोध कर रहा है और अगर प्रबंधन ने फैसला जल्द ही वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन होगा. इस तरह से फीस बढ़ाना विश्वविद्यालय के लिए शर्मनाक है, क्योंकि विद्यार्थियों के लिए शिक्षा फ्री होनी चाहिए. यह सरकारी विश्वविद्यालय है, लेकिन यहां पर तो हर दिन फीस बढ़ा दी जा रही है.

सुविधाएं नहीं, बस फीस बढ़ रही…
प्रसून पटेल ने बताया, प्रबंधन द्वारा छात्रों को बिना किसी सूचना के जो फीस बढ़ा दी जाती है, इससे परेशानी होती है. बहुत दूर-दूर से यहां पर विद्यार्थी पढ़ने के लिए आ रहे हैं. वह अपना खर्च कैसे चलाते हैं ये तो वही जानते हैं. इस तरह से अचानक फीस बढ़ा दी जाती है. एक तरफ अगर स्टूडेंट समय से फीस नहीं भर पता तो उसके लिए पेपर में बैठने नहीं दिया जाता, जो विश्वविद्यालय द्वारा स्टूडेंट को जरूरी चीज सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, वह तो कर नहीं पा रहे. लेकिन, हर दूसरे दिन फीस जरूर बढ़ा दी जाती है.

12 साल बाद लिया गया ये फैसला
वहीं, विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी प्रो. विवेक जायसवाल ने बताया, 12 साल से इस तरह के शुल्क को रिवाइज करते हुए वृद्धि की गई है. भारत सरकार से लगातार दिशा निर्देश मिलते रहते हैं कि आंतरिक राजस्व को बढ़ाने के लिए समय-समय पर फीस में वृद्धि कर सकते हैं. इसी क्रम में सक्षम प्राधिकारी द्वारा गठित समिति ने देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगने वाले इस तरह के शुल्क को दृष्टिगत रखते हुए अनुशंसा की, जिसके आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने स्वीकृति के बाद शुल्क में वृद्धि की गई है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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