छतरपुर यूनिवर्सिटी में 7.50 करोड़ की गड़बड़ी: विधानसभा में विधायक ललिता यादव ने उठाया मुद्दा; मंत्री के जवाब को बताया भ्रामक, अब होगी जांच – Chhatarpur (MP) News

छतरपुर यूनिवर्सिटी में 7.50 करोड़ की गड़बड़ी:  विधानसभा में विधायक ललिता यादव ने उठाया मुद्दा; मंत्री के जवाब को बताया भ्रामक, अब होगी जांच – Chhatarpur (MP) News




मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को छतरपुर विधायक ललिता यादव ने महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में 7.50 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कुलसचिव द्वारा बिना प्रशासकीय स्वीकृति के करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान करने और तथ्य छिपाकर सदन को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस पूरे प्रकरण की जांच कराने का आश्वासन दिया है। विधायक यादव के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने लिखित उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की स्वीकृति से बजट के अनुसार कुलपति निवास और प्रशासनिक भवन के लिए 17 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। बाउंड्रीवॉल, गेट निर्माण और गार्ड रूम के लिए 10 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। इस प्रकार, विश्वविद्यालय द्वारा लोक निर्माण विभाग (PIU) छतरपुर को कुल 27 करोड़ 50 लाख रुपये दिए गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अकादमिक भवन के लिए कोई राशि नहीं दी गई है। उन्होंने मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 24(14) का हवाला देते हुए बताया कि निर्माण कार्य की स्वीकृति कार्यपरिषद द्वारा दी गई थी। 20 करोड़ की थी मंजूरी, 7.50 करोड़ ज्यादा कैसे दिए?
उच्च शिक्षा मंत्री के लिखित उत्तर पर विधायक ललिता यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रस्तुत की गई जानकारी तथ्यों के विपरीत है और सदन को गुमराह करने वाली है। उन्होंने बताया कि कुलसचिव के 11 अप्रैल 2022 के पत्र के संदर्भ में उच्च शिक्षा विभाग ने 25 जुलाई 2022 को 40 करोड़ के प्रस्ताव के विरुद्ध केवल 20 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की थी। विधायक ने सवाल उठाया कि जब शासन द्वारा 20 करोड़ रुपये खर्च करने की स्पष्ट सीमा तय की गई थी, तो अतिरिक्त 7 करोड़ 50 लाख रुपये बिना शासन की अनुमति के किसके आदेश पर खर्च किए गए? क्या विश्वविद्यालय शासन के आदेशों से मुक्त हो गया है? ‘कार्यपरिषद सर्वोच्च थी तो 40 करोड़ की अनुमति क्यों मांगी?’
मंत्री द्वारा अधिनियम 1973 का हवाला देकर कार्यपरिषद को स्वीकृति का अधिकार बताने पर भी विधायक ने सवाल खड़े किए। विधायक ने तर्क दिया कि यदि कार्यपरिषद सर्वोच्च थी और उसे शासन की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11 अप्रैल 2022 को उच्च शिक्षा विभाग से 40 करोड़ की अनुमति क्यों मांगी थी? दोषी अधिकारियों पर उच्च स्तरीय जांच की मांग
विधायक ललिता यादव ने कहा कि शासन की स्पष्ट 20 करोड़ की सीमा का उल्लंघन कर 7.50 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करना एक प्रमाणित वित्तीय अनियमितता है। इसके साथ ही, विधानसभा में इस 20 करोड़ की स्वीकृति के पत्र (दिनांक 25 जुलाई 2022) को छिपाकर सदन को गुमराह किया गया है। उन्होंने मांग की कि मंत्री इस 7.50 करोड़ के अवैध भुगतान और सदन को गुमराह करने वाले दोषी अधिकारियों (कुलसचिव एवं अन्य) पर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दें। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर उच्च शिक्षा मंत्री ने जांच का आश्वासन दिया है।



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