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Chandra Grahan 2026 Upay: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, चंद्रग्रहण का समय संवेदनशील और ऊर्जा परिवर्तन का काल माना जाता है. इस दौरान वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
उज्जैन. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण को सामान्य खगोलीय घटना नहीं बल्कि विशेष प्रभाव वाला समय माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रग्रहण को महत्वपूर्ण घटना बताया गया है, जिसका असर मानव जीवन और प्रकृति दोनों पर पड़ता है, इसलिए परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में किसी भी प्रकार के शुभ, मांगलिक या नए कार्य की शुरुआत से परहेज किया जाता है. सूर्य या चंद्रग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ईश्वर का स्मरण करना शुभ माना जाता है जबकि विवाह, गृह प्रवेश, खरीदारी जैसे मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी जाती है. धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इस समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना भी जरूरी माना गया है. आइए जानते हैं उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद भारद्वाज से कि इस बार के चंद्रग्रहण में क्या करना चाहिए, किन बातों से बचना चाहिए और किस तरह ग्रहण काल को सकारात्मक बनाया जा सकता है.
पंचांग के अनुसार, तीन मार्च को चंद्रग्रहण दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा. ग्रहण समाप्ति से 12 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है. सूतक के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं और मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं. ज्योतिषाचार्य ने सलाह दी कि सुबह 6:30 से 9:30 बजे तक बुजुर्ग और मरीज भोजन कर सकते हैं लेकिन दिन और शाम के समय संयम रखकर भजन-पूजन करना उचित रहेगा.
चंद्रग्रहण पर क्या करें?
चंद्रग्रहण के बाद दान करने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन चावल, दूध, घी, सफेद वस्त्र और चांदी का दान करने से चंद्र दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन मंत्र जाप बेहद फलदायी होता है. भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र और चंद्रमा का मंत्र ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः’ का जप करना चाहिए. इसके साथ ही आप अपने ईष्टदेव के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं. इस समय धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए. माना जाता है कि इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना चाहिए. इससे शरीर और घर में फैली नकारात्मकता दूर होती है. स्नान के बाद घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव अवश्य करें.
चंद्रग्रहण पर क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण का समय संवेदनशील और ऊर्जा परिवर्तन का काल माना जाता है. इस दौरान वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जाती है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. परंपराओं के मुताबिक, ग्रहण काल में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श नहीं करना चाहिए और घर के मंदिर को साफ कपड़े, विशेषकर लाल या पीले वस्त्र से आच्छादित कर देना उचित माना जाता है. मान्यता है कि इस समय तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पवित्र वृक्षों को भी नहीं छूना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ प्रभाव का कारण माना जाता है. ग्रहण के दिन सकारात्मक वातावरण बनाए रखना जरूरी है, इसलिए नकारात्मक सोच या कटु वचन बोलने वाले लोगों से दूरी रखना बेहतर माना गया है. इस दौरान विवाद, कलह या अनावश्यक बहस से बचना चाहिए ताकि घर की शांति और सौहार्द बना रहे.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.