अंतिम संस्कार करने वाले मुस्लिम युवक महिला के पड़ोसी हैं
मृतक महिला (Lady) की दो बेटियां हैं. घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था. मौत (Death) की सूचना पाकर भी कोई रिश्तेदार नहीं आया.
सिवनी में जिसने भी ये देखा और सुना उसकी आंखें नम हो गयीं. यहां के भगतसिंह वॉर्ड में 74 साल की महिला रहती थीं. परिवार में उनके साथ उनकी दो बेटियां भी थीं. लेकिन घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था. महिला की पिछले दिनों तबियत खराब हो गयी. कोरोना के इस दौर में पड़ोस में रहने वाला मुस्लिम परिवार मदद के लिए आगे आया. उन्होंने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया. वहां उनका इलाज चल ही रहा था कि इस बीच महिला की मौत हो गयी.
नहीं आए रिश्तेदारमौत की सूचना उनकी बेटियों ने अपने नाते-रिश्तेदारों को दी. लेकिन दुख और संकट की इस घड़ी में कोई भी उनके पास नहीं आया. मां की मौत होने से बेटियां गम और सदमे में थीं. लेकिन उनके रिश्ते नातेदार अंतिम संस्कार कराने आगे नहीं आये. इस बात की सूचना पड़ोस के मुस्लिम युवाओं को लगी तो उन्होंने बुजु़र्ग महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई. वो पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनकी अर्थी सजा कर मोक्षधाम ले गए. वहां महिला के पार्थिव शरीर का पूरे विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया.