75 से बढ़कर 200 रुपए महीना हुआ जलकर: हरदा में नपा उपाध्यक्ष ने सीएमओ को लिखा पत्र, परिषद में पुनर्विचार की उठी मांग – Harda News

75 से बढ़कर 200 रुपए महीना हुआ जलकर:  हरदा में नपा उपाध्यक्ष ने सीएमओ को लिखा पत्र, परिषद में पुनर्विचार की उठी मांग – Harda News




हरदा नगर पालिका परिषद में प्रस्तावित जलकर वृद्धि को लेकर जनहित का मुद्दा गहराता जा रहा है। 29 अगस्त 2025 को आयोजित साधारण सम्मेलन में प्रस्ताव क्रमांक 17 के तहत जलकर की मासिक दर 75 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये करने का निर्णय बहुमत से पारित किया गया था। अब इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग तेज हो गई है। नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष अंशुल गोयल ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर कहा है कि इस वृद्धि के बाद उन्हें आम नागरिकों और अपने वार्ड के निवासियों से लगातार आपत्तियां और असंतोष की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। उनके मुताबिक जनभावनाओं की अनदेखी करना उचित नहीं है और परिषद को इस निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए। 100 से 120 रखने की मांग
गोयल ने सुझाव दिया है कि जलकर की दर 75 रुपये से सीधे 200 रुपये करने के बजाय इसे 100 से 120 रुपये के बीच रखा जाए, ताकि आम लोगों पर एकमुश्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका तर्क है कि सीमित वृद्धि से नगर पालिका की वित्तीय जरूरतें भी आंशिक रूप से पूरी होंगी और जनता पर अचानक अतिरिक्त भार भी नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 2 सितंबर 2025 को भी पत्र भेजा जा चुका है। कचरा संग्रहण शुल्क पर भी विवाद
मामले में कचरा संग्रहण शुल्क की बढ़ोतरी भी विवाद का कारण बनी हुई है। परिषद के निर्णय के अनुसार आवासीय संपत्तियों से 30 रुपये, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 100 रुपये और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 2000 रुपये मासिक शुल्क तय किया गया था। हालांकि कुछ प्रतिष्ठानों से 3000 रुपये मासिक शुल्क वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जो परिषद के निर्णय के विपरीत बताया जा रहा है। इससे संपत्ति कर में भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी होने की बात कही जा रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्षद अक्षत उपरीत ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही जलकर वृद्धि के खिलाफ रही है। उनका आरोप है कि यह फैसला जनता के हितों के विपरीत है और महंगाई के दौर में आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालता है। अब निगाहें आगामी साधारण सभा की बैठक पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव को संकल्प सूची में शामिल कर पुनर्विचार किए जाने की संभावना है। जनप्रतिनिधियों के बीच जारी इस मतभेद ने जलकर वृद्धि के मुद्दे को शहर में जनचर्चा का विषय बना दिया है।



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