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जम्मू कश्मीर की टीम पहली बार रणजी में इतिहास रचने के करीब पहुंच गई है. इसका श्रेय रणजी के पूर्व क्रिकेटर रहे मिथुन मन्हास को जाता है जो एक खिलाड़ी के तौर पर तो बेहतरीन रहे ही, वह एक प्रशासनिक के तौर पर भी लगातार काम कर रहे हैं.
बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास.
जम्मू कश्मीर की रणजी टीम ने इतिहास रच दिया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब टीम फाइनल में पहुंची है और जीत के करीब भी है. टीम के इस प्रदर्शन के पीछे बरसों की मेहनत है. खासतौर से 2021 में जिस तरह जम्मू कश्मीर क्रिकेट बोर्ड विवादों में घिरा था. उसके बाद न सिर्फ बोर्ड ने अपनी छवि सुधारी बल्कि खिलाड़ियों के लिए भी काम किया, जिसका असर अब दिख रहा है.
इस पूरी कवायद के पीछे एक नाम जिसका सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है वह है मिथुन मन्हास. मिथुन जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख हैं और वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की कमान संभाल रहे हैं.
मिथुन मन्हास एक खिलाड़ी के तौर पर तो बेहतरीन रहे ही, वह एक प्रशासनिक के तौर पर भी लगातार काम कर रहे हैं. जम्मू कश्मीर के ही भलेसा में 1979 में हुआ था. क्रिकेट में मन्हास ने मजबूत मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में जगह बनाई. बेशक वे कभी भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं खेले, लेकिन घरेलू स्तर पर उन्होंने जम्मू कश्मीर और उससे पहले दिल्ली की टीमों का प्रतिनिधित्व किया. वह 2017 में रिटायरमेंट तक कश्मीर के लिए खेलते रहे, उससे पहले वह दिल्ली से जुड़े रहे थे.
मन्हास ने अपना क्रिकेट करियर दिल्ली से शुरू किया था. उन्होंने 1997-98 सीजन में दिल्ली की रणजी टीम से पहला प्रथम श्रेणी मैच खेला था. दिल्ली में रहते हुए उन्होंने विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के साथ खेला और कई बार कप्तानी भी की, खासतौर से गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग के टीम में न होने पर. 2007-08 रणजी सीजन में उन्होंने दिल्ली को कप्तानी करते हुए रणजी ट्रॉफी जीतने में अहम भूमिका निभाई, जहां उन्होंने 921 रन बनाए उनका औसत 57.56) रन रहा था. वह 2014-15 तक दिल्ली के लिए क्रिकेट खेलते रहे. इसके बाद वह जम्मू कश्मीर शिफ्ट हो गए और 2017 तक वहीं से क्रिकेट खेलते रहे.
मन्हास जन्म से जम्मू-कश्मीर के हैं, लेकिन शुरुआत में दिल्ली से खेले क्योंकि वहां बेहतर सुविधाएं थीं. 2015 में उन्होंने दिल्ली छोड़कर जम्मू-कश्मीर जॉइन किया. 2015-16 रणजी ट्रॉफी से वे जम्मू-कश्मीर टीम में शामिल हुए और 2016-17 में रिटायरमेंट तक खेले. इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर की टीम को मजबूती दी. रिटायरमेंट के बाद मन्हास ने प्रशासनिक भूमिका निभाई. 2021 में BCCI ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ गए. जब बोर्ड पर मिस मैनेजमेंट और करप्शन के आरोप लगे तो एक सब कमिटी बनाई गई, जिसमें मन्हास शामिल थे. इसके बाद वे JKCA के टेक्नीकल डायरेक्टर बने.
मिथुन मन्हास ने जम्मू कश्मीर में टैलेंट को तलाशा और उन्हें निखारने के लिए बेहतर सेटअप तैयार किया. उन्होंने जेकेसीए में सुधार किए और नई पिचेज तैयार की. इससे जम्मू कश्मीर की रणजी टीम मजबूत हुई. JKCA में उनकी भूमिका बढ़ी तो वह बीसीसीआई में राज्य का प्रतिनिधित्व करने लगे. सितंबर 2025 में बीसीसीआई के 94वें एजीएम में वे बिना विरोध के बीसीसीआई के प्रेसीडेंट चुने गए. मन्हास भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के 37वें प्रेसिडेंट हैं, उन्होंने रॉजर बिन्नी के बाद यह पद संभाला संभाला है. वह जम्मू कश्मीर से इस पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं.
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