किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत मन्दसौर जिले में किसानों के हित में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में उद्यानिकी महाविद्यालय में मंदसौर गुरुवार शाम कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में नरवाई प्रबंधन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता कर नरवाई प्रबंधन की उन्नत एवं वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति होती है कम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर अदिती गर्ग ने कहा कि नरवाई प्रबंधन से जहां किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, वहीं पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और भूमि की गुणवत्ता आने वाली पीढ़ियों के लिए कमजोर हो जाती है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि नरवाई को जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाकर जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग करें और परंपरागत खेती पद्धतियों को अपनाएं। कलेक्टर ने कहा कि जिले के उन्नत किसानों को और अधिक सक्षम बनाने के लिए प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अलसी के डंठल से रेशा तैयार करने का नवाचार कलेक्टर ने बताया कि जिले में अलसी के डंठल से रेशा तैयार करने का अभिनव प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में पिछले छह माह से कार्य जारी है। एफपीओ के माध्यम से इस क्षेत्र में मशीन विकसित की गई है तथा किसानों के सहयोग से इस कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। एफपीओ के माध्यम से किसानों को प्रति हेक्टेयर लगभग 1200 से 1500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। कलेक्टर ने कृषि विभाग, एफपीओ एवं कृषि विज्ञान केंद्र को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए किसानों को इस नवाचार से जोड़ने तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जैविक हाट बाजार को बढ़ावा देने का आह्वान कलेक्टर ने किसानों से प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले जैविक हाट बाजार में जैविक उत्पादों के विक्रय एवं उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि जिले में देश का पहला सरसों संगम भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के उन्नत किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों ने नरवाई प्रबंधन को लेकर अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए। कार्यशाला के दौरान किसानों को नरवाई नहीं जलाने की शपथ भी दिलाई गई। कृषि यंत्रों पर अनुदान एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी कृषि विभाग के उपसंचालक श्री मोदी ने किसानों को कृषि यंत्रों के उपयोग तथा उन पर उपलब्ध शासकीय अनुदान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नरवाई को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है, जिससे उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है और उत्पादन में सुधार होता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को खेती में नवीन तकनीकों के उपयोग, फसलों में विविधता अपनाने एवं उन्नत बीजों के प्रयोग की सलाह दी। उन्होंने वेस्ट डी-कंपोजर एवं बायो कंपोजर के उपयोग की जानकारी देते हुए फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया। कार्यशाला में किसानों की सक्रिय भागीदारी रही और उन्हें नरवाई प्रबंधन की आधुनिक पद्धतियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूक करना रहा।
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