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4 cricketers fight with boards ruined their career: क्रिकेट की दुनिया में अक्सर खिलाड़ी और बोर्ड के बीच का तालमेल ही सफलता की इबारत लिखता है. लेकिन जब यह रिश्ता तल्खी में बदलता है, तो नुकसान खेल और खिलाड़ी दोनों का होता है. अंबाती रायडू का ‘थ्री-डी’ तंज हो या केविन पीटरसन का इंग्लिश बोर्ड से खुला विद्रोह, इन दिग्गजों ने साबित किया कि सिस्टम से टकराने की कीमत करियर गंवाकर चुकानी पड़ती है. जहां ड्वेन ब्रावो और मोहम्मद आमिर ने अपनी शर्तों पर जीने के लिए बोर्ड की नीतियों को चुनौती दी, वहीं बोर्ड के कड़े रुख ने उनके अंतरराष्ट्रीय सफर पर विराम लगा दिया.
एक ट्वीट की वजह से रायडू फिर टीम इंडिया में जगह नहीं बना पाए.
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर बल्ले और गेंद की जंग तो हम अक्सर देखते हैं, लेकिन एक जंग मैदान के बाहर भी चलती है. उस जंग का नाम है खिलाड़ी बनाम क्रिकेट बोर्ड. इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी खिलाड़ी ने अपनी शर्तों पर जीने या बोर्ड की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी. अंबाती रायूडू, मोहम्मद आमिर, केविन पीटरसन और ड्वेन ब्रावो जैसे नाम इस बात के जीते-जागते उदाहरण हैं कि बोर्ड से उलझना कैसे एक सुनहरे करियर को तबाह कर देता है.
भारतीय क्रिकेट में अंबाती रायडू (Ambati Rayudu) का करियर प्रतिभा और विवादों का मिश्रण रहा. 2019 वर्ल्ड कप से ठीक पहले वे भारत की नंबर-4 की समस्या का समाधान माने जा रहे थे. लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम में न चुनकर विजय शंकर को ‘थ्री-डी’ खिलाड़ी बताकर मौका दिया. रायडू ने तंज कसते हुए ट्वीट किया कि ‘वर्ल्ड कप देखने के लिए मैंने थ्री-डी चश्मा ऑर्डर किया है.’ बोर्ड के खिलाफ यह खुला विद्रोह उन्हें इतना भारी पड़ा कि उन्हें कभी दोबारा टीम इंडिया की जर्सी नसीब नहीं हुई और उन्होंने गुस्से में संन्यास तक का ऐलान कर दिया.
एक ट्वीट की वजह से रायडू फिर टीम इंडिया में जगह नहीं बना पाए.
इंग्लैंड क्रिकेट का ‘विद्रोही’ सितारा
केविन पीटरसन शायद इंग्लैंड के इतिहास के सबसे प्रतिभाशाली लेकिन सबसे विवादास्पद बल्लेबाज रहे. बोर्ड के साथ उनके संबंध कभी सामान्य नहीं रहे. आईपीएल खेलने की जिद हो या कोच एंडी फ्लावर के साथ अनबन, पीटरसन हमेशा ‘सिस्टम’ के खिलाफ खड़े रहे। 2012 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के दौरान विपक्षी खिलाड़ियों को अपनी ही टीम के खिलाफ मैसेज भेजने के आरोपों ने आग में घी का काम किया. नतीजा यह हुआ कि अपने चरम पर होने के बावजूद इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने उनके लिए दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए.
बोर्ड और कॉन्ट्रैक्ट की लड़ाई
वेस्टइंडीज क्रिकेट और उनके बोर्ड (WICB) के बीच विवाद की कहानी काफी पुरानी है. ड्वेन ब्रावो इस लड़ाई के सबसे बड़े मोहरों में से एक थे. 2014 के भारत दौरे के बीच में ही बोर्ड के साथ भुगतान विवाद के कारण पूरी टीम का दौरा बीच में छोड़ देना एक ऐतिहासिक विद्रोह था. ब्रावो ने खिलाड़ियों के हक के लिए आवाज उठाई, लेकिन बदले में बोर्ड ने उन्हें वनडे कप्तानी से हटा दिया और लंबे समय तक टीम से बाहर रखा. इसी विवाद के कारण वेस्टइंडीज के कई मैच-विनर्स ‘फ्रीलांस’ टी20 खिलाड़ी बनकर रह गए.
वापसी और कड़वाहट
पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर का करियर किसी फिल्मी पटकथा जैसा है. स्पॉट फिक्सिंग के बैन के बाद जब उन्होंने वापसी की, तो उन्हें वह समर्थन नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी. आमिर ने तत्कालीन कोच मिस्बाह-उल-हक और वकार यूनुस पर ‘मानसिक प्रताड़ना’ का आरोप लगाते हुए बोर्ड के काम करने के तरीके की कड़ी आलोचना की. उन्होंने बोर्ड के रवैये से तंग आकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया. हालांकि बाद में वापसी की कोशिशें हुईं, लेकिन बोर्ड के साथ उस तल्खी ने उनके करियर के बेशकीमती साल बर्बाद कर दिए.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें