सफर होगा तेज, दो राज्यों को जोड़ेगा मेगा कॉरिडोर, बिजनेस और पर्यटन को मिलेगा बूस्ट

सफर होगा तेज, दो राज्यों को जोड़ेगा मेगा कॉरिडोर, बिजनेस और पर्यटन को मिलेगा बूस्ट


Gwalior-Nagpur Six Lane Corridor: मध्य भारत में आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari की घोषणा के बाद ग्वालियर से बैतूल होते हुए नागपुर तक प्रस्तावित सिक्स लेन कॉरिडोर को गति मिलती दिखाई दे रही है. लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, औद्योगिक विस्तार, पर्यटन विकास और लॉजिस्टिक क्षमता को नया आयाम दे सकती है.

Ministry of Road Transport and Highways ने इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रारंभिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं. वहीं National Highways Authority of India के माध्यम से सिवनी जिले के लखनादौन और खवासा क्षेत्र के बीच मौजूदा सड़क पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट हटाने, अंडरपास और जरूरी पुलों के निर्माण की दिशा में कार्यवाही जारी है. सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देते हुए यातायात को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की तैयारी की जा रही है.

569 किलोमीटर का आधुनिक कॉरिडोर
प्रस्तावित यह मार्ग लगभग 569 किलोमीटर लंबा होगा. यह मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल जिलों से गुजरते हुए महाराष्ट्र के नागपुर तक पहुंचेगा. परियोजना पूर्ण होने के बाद Gwalior से Nagpur तक की दूरी लगभग 10 घंटे में तय की जा सकेगी. वर्तमान परिस्थितियों में यह यात्रा अधिक समय लेती है, लेकिन नियंत्रित प्रवेश-निकास प्रणाली और उच्च स्तरीय निर्माण तकनीक के कारण आवागमन तेज और व्यवस्थित होगा.

समय की बचत का सीधा लाभ व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा. कृषि उत्पाद, वन उपज, खनिज संसाधन और औद्योगिक सामान कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे. इससे परिवहन लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी.

ग्रीनफील्ड या चौड़ीकरण पर मंथन
परियोजना को नए अलाइनमेंट (ग्रीनफील्ड) पर विकसित किया जाए या मौजूदा मार्ग का चौड़ीकरण किया जाए, इस पर विचार-विमर्श जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबाई और लागत को देखते हुए ग्रीनफील्ड मॉडल अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है. नए मार्ग के निर्माण से भारी यातायात दबाव कम होगा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जा सकेंगी.

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में सर्विस लेन, आपातकालीन सहायता प्रणाली, बेहतर जल निकासी, आधुनिक टोल प्लाजा और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल की जा सकती हैं. इससे सड़क सुरक्षा और यात्री सुविधा दोनों में सुधार होगा.

पर्यटन और निवेश को बढ़ावा
बेहतर सड़क संपर्क का सीधा प्रभाव पर्यटन क्षेत्र पर पड़ेगा. Gwalior का ऐतिहासिक महत्व, Shivpuri की प्राकृतिक सुंदरता, Bhopal की सांस्कृतिक पहचान और Betul का वन क्षेत्र- इन सभी स्थानों तक पहुंच अधिक सुगम होगी. सप्ताहांत पर्यटन, धार्मिक यात्राएं और इको-टूरिज्म गतिविधियां बढ़ने की संभावना है. साथ ही, मार्ग के किनारे लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग जोन और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाने की योजना भी चर्चा में है. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

दो राज्यों को जोड़ेगा कॉरिडोर
यह परियोजना सीधे दो राज्यों Madhya Pradesh और Maharashtra को जोड़ते हुए मध्य भारत को राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क में सशक्त स्थिति प्रदान करेगी.  मध्य प्रदेश के नौ जिलों को जोड़ने वाला यह मार्ग व्यापार, कृषि विपणन और औद्योगिक निवेश के लिए नई संभावनाएं खोलेगा. अगर भविष्य में इसे उत्तर भारत की अन्य एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से जोड़ा गया, तो यह दिल्ली से नागपुर तक निर्बाध संपर्क श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.



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