खिलचीपुर में फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र बनाने का मामला: 25 हजार में नकली दस्तावेज, CMO की फर्जी सील-हस्ताक्षर का खुलासा, पार्षद पति पर आरोप – rajgarh (MP) News

खिलचीपुर में फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र बनाने का मामला:  25 हजार में नकली दस्तावेज, CMO की फर्जी सील-हस्ताक्षर का खुलासा, पार्षद पति पर आरोप – rajgarh (MP) News




राजगढ़ जिले के खिलचीपुर नगर परिषद में फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामने आने के बाद अब यह मामला पुलिस तक पहुंच गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने नगर परिषद के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। मामले में नगर परिषद की सील और CMO देवनारायण दांगी के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किए जाने से प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार वार्ड 4, कालाजी बड़ली क्षेत्र निवासी युवक जितेंद्र को जमीन से संबंधित स्वामित्व प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। युवक का आरोप है कि राम प्रसाद विश्वकर्मा के माध्यम से वार्ड क्रमांक 04 के पार्षद पति राजू वर्मा ने उससे 25 हजार रुपए लेकर नगर परिषद का स्वामित्व प्रमाण पत्र बनवाकर दिया। युवक को बताया गया कि यह प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध है और वह इसका उपयोग लोन और रजिस्ट्री प्रक्रिया में कर सकता है। शुक्रवार को जब युवक उक्त प्रमाण पत्र लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचा, तो वहां दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। अधिकारियों ने प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच कराने के लिए उसे नगर परिषद भेजा। नगर परिषद कार्यालय में लेखापाल रामलाल ने दस्तावेज की जांच की और स्पष्ट किया कि यह प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी है। प्रमाण पत्र पर लगे हस्ताक्षर CMO के नहीं हैं और नगर परिषद के रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई दस्तावेज जारी नहीं किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए CMO देवनारायण दांगी ने तत्काल खिलचीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में नगर परिषद की फर्जी सील और हस्ताक्षर का उपयोग कर दस्तावेज तैयार करने वाले अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है। वहीं वार्ड क्रमांक 04 के पार्षद पति राजू वर्मा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया है और उन्हें जानबूझकर इस मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवक के परिजनों द्वारा भी पैसे राम प्रसाद को देने की बात कही जा रही है, ऐसे में उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। नगर परिषद में फर्जी दस्तावेज बनने की घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और दस्तावेज सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद में निष्पक्ष जांच कराई जाए तो इस तरह के और भी मामले सामने आ सकते हैं। फिलहाल CMO की शिकायत के बाद पुलिस जांच शुरू होने से मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।



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