MP NEWS: मध्य प्रदेश के शिवपुरी से करीब 35 किलोमीटर दूर लुकवासा गांव में एक ऐसी जगह है, जहां लोग सिर्फ दर्शन करने नहीं, बल्कि उम्मीद लेकर आते हैं. यहां मौजूद है करीब 200 साल पुरानी कल्पवृक्ष की जोड़ी, जिसे गांव वाले प्यार से ‘राजा-रानी’ कहते हैं. कहते हैं, यहां सच्चे मन से जो भी मांगो, वो खाली नहीं जाता.
क्यों खास है ‘राजा-रानी’ की ये जोड़ी?
आमतौर पर कल्पवृक्ष का मिलना ही दुर्लभ माना जाता है, लेकिन लुकवासा में दो पेड़ साथ-साथ खड़े हैं. पतले तने वाले पेड़ को ‘राजा’ यानी नर और मोटे तने वाले को ‘रानी’ यानी मादा कहा जाता है. दोनों की डालियां इस तरह आपस में उलझी दिखती हैं, जैसे कोई दंपति सालों से साथ खड़ा हो.
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि ये पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं, आस्था का प्रतीक हैं. शादी, संतान, नौकरी, सेहत हर मनोकामना लेकर लोग यहां आते हैं.
फल भी हैं अनोखे
ग्रामीणों के मुताबिक इन पेड़ों के फल भी अलग तरह के होते हैं. देखने में आम, नारियल और बेल के मिश्रण जैसे लगते हैं. पकने के बाद रंग और आकार सूखे खजूर जैसा हो जाता है. वनस्पति विशेषज्ञ इसे दुर्लभ प्रजाति मानते हैं, लेकिन गांव वालों के लिए ये चमत्कार से कम नहीं.
कैसे मांगते हैं मुराद?
लोग पेड़ के नीचे धागा बांधते हैं, दीप जलाते हैं और मन ही मन अपनी इच्छा बोलते हैं. कई श्रद्धालु बताते हैं कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद वे दोबारा यहां धन्यवाद देने जरूर आते हैं. त्योहारों पर यहां छोटा सा मेला जैसा माहौल बन जाता है.
आस्था के साथ प्रकृति की विरासत
लुकवासा का ये स्थल सिर्फ धार्मिक नहीं, पर्यावरण की दृष्टि से भी अहम है. इतने पुराने पेड़ों को सुरक्षित रखना बड़ी जिम्मेदारी है, और गांव वाले इसे अपनी सेवा मानते हैं. ‘राजा-रानी’ की ये जोड़ी आज भी लोगों को विश्वास, सुकून और उम्मीद देती है. जो भी यहां आता है, कुछ पल इनके साए में बैठकर अलग ही शांति महसूस करता है.