प्रदूषण बोर्ड की चेतावनी बिना ट्रीटमेंट पेयजल सप्लाय न करें: चुनौती-पीथमपुर का सीवेज गंभीर में पहुंच रहा, यशवंत सागर, लोटस वैली तक असर – Indore News

प्रदूषण बोर्ड की चेतावनी बिना ट्रीटमेंट पेयजल सप्लाय न करें:  चुनौती-पीथमपुर का सीवेज गंभीर में पहुंच रहा, यशवंत सागर, लोटस वैली तक असर – Indore News




कान्ह–सरस्वती और शहर के सीवरेज से शिप्रा के प्रदूषण के बाद अब पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का असर गंभीर नदी पर दिखने लगा है। केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में सामने आया है कि गंभीर नदी का दूषित पानी आगे रामसर साइट घोषित यशवंत सागर तक पहुंच रहा है। जांच में गंभीर नदी में मल में पाए जाने वाले फीकल कॉलीफाॅर्म बैक्टीरिया की मात्रा 11,000 से 16,800 तक मिली है। वहीं यशवंत सागर में यह करीब 4,000 तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही ई-कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा भी मानक से अधिक निकली है। ये वहीं बैक्टीरियां है, जिनके कारण भागीरथपुरा की पेयजल त्रासदी हुई थी। कई स्थानों पर डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) 4 मिग्रा प्रति लीटर मिली, जबकि 6 से 7 या उससे अधिक होना चाहिए। डीओ स्तर घटने से जलीय जीवन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर मछलियों और अन्य जीवों के मरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि बिना ट्रीटमेंट इस पानी का पेयजल उपयोग नहीं किया जाए, अन्यथा पश्चिम क्षेत्र को रोज मिलने वाला 30 एमएलडी पानी प्रभावित हो सकता है। गंभीर नदी धार और इंदौर को जोड़ते हुए बेटमा, हातोद और देपालपुर क्षेत्र से गुजरती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस कदम नहीं उठाए तो पेयजल और पर्यावरण दोनों पर गंभीर असर दिखेगा। ई-कोलाई अधिक, ऑक्सीजन कम; यशवंत सागर पर भी संकट 16,800 तक फीकल कॉलीफाॅर्म मिला गंभीर नदी में 4,000 तक पहुंची इस बैक्टीरिया की मात्रा यशवंत सागर में 4 मिग्रा प्रति लीटर मिली घुली ऑक्सीजन, यह 6-7 होनी चाहिए कहां से बढ़ रहा प्रदूषण? रामसर साइट का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होगा
यशवंत सागर को उसकी जैव विविधता और जल गुणवत्ता के कारण रामसर साइट घोषित किया गया है। यदि गंभीर नदी का प्रदूषण नहीं रोका गया तो झील की जल गुणवत्ता और गिरेगी। लोटस वैली का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होगा। पेयजल आपूर्ति पर दीर्घकालीन संकट खड़ा हो सकता है। सरकार और प्रदूषण बोर्ड की सिफारिशें जांच रिपोर्ट सौंपी, एसटीपी बनाने के लिए कहा है…
सरकार से मिले निर्देश के बाद अलग अलग स्थानों पर से पानी के सैंपल लेकर जांच की थी। जांच रिपोर्ट बोर्ड और नगरीय विकास व आवास विभाग को भेज दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीपी बनाने के लिए कहा है। -सतीश कुमार चौकसे, क्षेत्रीय अधिकारी



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