भोपाल के डॉ. कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत के पहले ही दिन एक 14 वर्षीय किशोरी तान्या माथुर की वैक्सीनेशन के बाद तबीयत बिगड़ने से कुछ देर के लिए हलचल मच गई। बच्ची को खांसी आई और हल्के चक्कर महसूस हुए। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत उसका ब्लड प्रेशर चेक किया, जो सामान्य पाया गया। एहतियात के तौर पर उसे ओआरएस का घोल पिलाकर आराम कराया गया। करीब 10 मिनट में उसकी स्थिति सामान्य हो गई और वह घर चली गई। मौजूदा डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची सुबह से खाली पेट थी। जिस वजह से उसे चक्कर आए, इसमें वैक्सीनेशन का कोई रोल नहीं है।
वहीं, शनिवार से प्रदेश में 8 लाख बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लक्ष्य के साथ एचपीवी टीकाकरण अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। सरकार का कहना है कि यह पहल भविष्य में महिलाओं को एक बड़ी और दर्दनाक बीमारी से बचाने की दिशा में अहम कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि बाजार में एचपीवी वैक्सीन की कीमत करीब 4 हजार रुपये प्रति डोज है, लेकिन सरकार इसे पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध करा रही है। उन्होंने अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस अभियान को जनआंदोलन बनाएं। उनका कहना है कि बीमारी का इलाज करने से बेहतर है समय रहते बचाव करना। हर टीके के बाद 30 मिनट की निगरानी अनिवार्य
प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण सत्र रोज सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित होंगे। 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाएं पात्र हैं। टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक है और अभिभावक की सहमति आवश्यक है। यू-विन पोर्टल पर पंजीकरण कर स्लॉट लिया जा सकता है। टीका लगने के बाद 30 मिनट तक निगरानी में रखा जाएगा। हल्के दुष्प्रभाव जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सिरदर्द सामान्य हैं। हेल्पलाइन 104 भी जारी की गई है, जिससे जानकारी और सहायता मिल सके। 3 माह तक चलेगा अभियान
एनएचएम की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और दुनिया भर में लाखों बालिकाओं को दी जा चुकी है। यह अभियान तीन माह तक चलेगा, जिसमें देशभर की 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 1 करोड़ बालिकाओं को टीका लगाया जाएगा। मध्यप्रदेश में 8 लाख किशोरियों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल प्रिवेंटिव हेल्थ केयर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। सबसे पहला टीकाकरण भाव्या का अभियान के तहत सबसे पहला टीकाकरण 14 साल की भाव्या का किया गया। भाव्या ने कहा कि यह वैक्सीन भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है और उसे कोई दिक्कत नहीं हुई। उसने कहा कि वह अपनी सहेलियों को भी इस बारे में बताएगी ताकि वे भी समय पर टीका लगवा सकें। खबर पढ़कर खुद पहुंची आना
शालीमार गार्डन की 14 वर्षीय आर्ना हांडा ने बताया कि उन्होंने अखबार में अभियान की खबर पढ़ी। इसके बाद उन्होंने खुद यू-विन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया और अस्पताल पहुंचीं। आर्ना की जागरूकता की एनएचएम की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने सराहना की। भोपाल से प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत
राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत भोपाल से की गई। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअल उपस्थिति रही। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि रिसर्च से साबित हुआ है कि एचपीवी वायरस सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। वैक्सीनेशन से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में होने वाले कैंसर के मामलों में सर्वाइकल कैंसर दूसरे नंबर पर है, इसलिए यह अभियान बेहद जरूरी है। 90 दिन में 8 लाख बालिकाओं का लक्ष्य
प्रदेश में करीब 8 लाख 14 वर्षीय बालिकाओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 90 दिनों में यह लक्ष्य पूरा करने की योजना बनाई है। पहले चरण में 5.8 लाख डोज जिलों में भेजी जा चुकी हैं। टीकाकरण स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में किया जाएगा। लगाई जा रही यह वैक्सीन
अभियान के तहत गार्डासिल-4 (क्वाड्रीवेलेंट एचपीवी वैक्सीन) की सिंगल डोज दी जा रही है। यह एचपीवी टाइप 16 और 18 से सुरक्षा देती है, जो सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारण माने जाते हैं। साथ ही यह टाइप 6 और 11 से भी बचाव करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 9 से 14 वर्ष की उम्र में टीका लगने पर आगे चलकर कैंसर का खतरा 80 से 85 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। हर साल सवा लाख महिलाएं आ रहीं कैंसर की चपेट में
भारत में हर साल करीब 1.25 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की चपेट में आती हैं और लगभग 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखते। डॉक्टरों का कहना है कि किशोरावस्था में वैक्सीनेशन भविष्य में इस बीमारी से बचाव का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। ऐसे करा सकतें हैं रजिस्ट्रेशन
अभिभावक यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा सीधे नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भी संपर्क किया जा सकता है। भोपाल में यह सुविधा 18 केंद्रों पर उपलब्ध है, जिनमें एम्स भोपाल, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। टीकाकरण के समय उम्र का प्रमाण, मोबाइल नंबर और अभिभावक की सहमति जरूरी होगी। पहले दिन 15 बालिकाओं को लगी वैक्सीन
काटजू अस्पताल में पहले दिन कुल 15 बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। इनमें से तान्या माथुर नाम की एक बच्ची को टीका लगने के बाद हल्की परेशानी हुई। डॉक्टरों के अनुसार यह सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है, जो कई बार इंजेक्शन या घबराहट की वजह से होती है। जांच में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया कि सभी केंद्रों पर वैक्सीनेशन के बाद 15 से 30 मिनट तक निगरानी की व्यवस्था रखी गई है।
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