टीम इंडिया का ट्रंप कॉर्ड बना ‘जोकर’, 2 कैच छोड़ा और बनाए सिर्फ 10 रन

टीम इंडिया का ट्रंप कॉर्ड बना ‘जोकर’, 2 कैच छोड़ा और बनाए सिर्फ 10 रन


नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में ‘हीरो’ से ‘जीरो’ बनने का सफर पलक झपकते ही तय हो जाता है.  कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए निर्णायक मुकाबले में युवा सनसनी अभिषेक शर्मा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. जिस खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट का अगला ‘ट्रंप कार्ड’ माना जा रहा था, वह इस अहम मैच में टीम इंडिया के लिए ‘पनौती’ साबित हुए.  न बल्ले से रन निकले, न हाथों में गेंद रुकी और न ही फील्डिंग में वो पैनापन दिखा जिसके लिए वे जाने जाते हैं। ईडन की भीड़ जो उनकी बल्लेबाजी के मुरीद होने आई थी, वह उनकी गलतियों पर सिर पकड़ने को मजबूर हो गई.

जिस खिलाड़ी को गेम-चेंजर समझा जा रहा था, वह टीम के लिए बोझ बन गया अगर समय रहते उन्होंने अपनी गलतियों से सबक नहीं लिया, तो नीली जर्सी में उनका यह सफर बहुत जल्द खत्म हो सकता है. फिलहाल, कोलकाता में अभिषेक की खराब फील्डिंग और बल्लेबाजी एक कड़वी याद बनकर रह गई है.
फील्डिंग में फ्लॉप शो

एक पुरानी कहावत है, ‘कैच विन मैचेस’ (कैच मैच जिताते हैं), लेकिन अभिषेक शर्मा ने इस मैच में इसे पूरी तरह झुठला दिया. वेस्टइंडीज की पारी के दौरान अभिषेक ने एक नहीं, बल्कि दो ऐसे जीवनदान दिए जिन्होंने मैच में बड़ा असर डाला. पहले उन्होंने रास्टन चेस का एक सीधा कैच टपकाया, जिन्होंने बाद में क्रीज पर टिककर पारी को संभाल लिया लेकिन हद तो तब हो गई जब उन्होंने रोवमैन पॉवेल जैसा बड़ा मछली का कैच छोड़ दिया.  पॉवेल ने इस जीवनदान का फायदा उठाते हुए भारतीय गेंदबाजों की बखिया उधेड़ दी।.इन दो छूटे हुए कैचों ने भारत को बैकफुट पर धकेल दिया और टीम के लिए मुसीबत का पहाड़ खड़ा कर दिया.

बल्लेबाजी में फिसड्डी: सिर्फ 10 रनों का योगदान

जब अभिषेक बल्लेबाजी करने आए, तो उम्मीद थी कि वह अपनी खराब फील्डिंग की भरपाई अपने बल्ले से करेंगे. ईडन गार्डन्स की पिच बल्लेबाजी के लिए अनुकूल थी, लेकिन अभिषेक के पैर जैसे क्रीज पर जम ही नहीं पाए. महज 10 रन के निजी स्कोर पर एक गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर उन्होंने अपना विकेट गंवा दिया. उस समय टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी, लेकिन अभिषेक ने दबाव में घुटने टेक दिए.

वर्ल्ड कप में सुपर फ्लॉप 

अभिषेक शर्मा के पूरे वर्ल्ड कप अभियान पर नजर डालें, तो आंकड़े बेहद निराशाजनक हैं. पूरे टूर्नामेंट में उनके बल्ले से केवल एक अच्छी पारी निकली, जो कमजोर मानी जाने वाली जिम्बाब्वे की टीम के खिलाफ थी.   दक्षिण अफ्रीका,  अब वेस्टइंडीज जैसी बड़ी टीमों के सामने प्रदर्शन करने की बारी आई, तो वे पूरी तरह ‘जोकर’ साबित हुए बड़े मैचों में उनकी विफलता ने चयनकर्ताओं और प्रशंसकों के बीच उनकी जगह पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं. अभिषेक ने 6 मैचों में कुल 80 रन बनाए जो सारी कहानी बयां करता है.

अभिषेक शर्मा में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सिर्फ टैलेंट से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और निरंतरता से चलता है। कोलकाता में उनके द्वारा छोड़े गए कैच और सस्ते में आउट होने के बाद, अब उन्हें अपनी तकनीक और एकाग्रता पर गंभीरता से काम करना होगा.



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