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CJI Suryakant Latest News: जीएनयूएल के दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत ने युवा वकीलों को प्रोफेशनल स्पेशलाइजेशन का महत्व समझाने के लिए टी20 क्रिकेट का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि जैसे सूर्यकुमार यादव से डेथ ओवर में गेंदबाजी की उम्मीद नहीं की जाती, वैसे ही कानून में भी हर वकील से हर काम की उम्मीद नहीं की जा सकती.
सीजेआई सूर्यकांत ने क्यों दिया सूर्य कुमार यादव का उदाहरण
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने युवा वकीलों को प्रोफेशनल जीवन का अहम सबक सिखाने के लिए क्रिकेट का दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि जैसे टी20 क्रिकेट में हर खिलाड़ी से हर भूमिका निभाने की उम्मीद नहीं की जाती वैसे ही कानून के पेशे में भी हर वकील सभी क्षेत्रों में समान रूप से दक्ष नहीं हो सकता.
28 फरवरी को गांधीनगर स्थित गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने प्रोफेशनल स्पेशलाइजेशन की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सफल टीमें चाहे क्रिकेट की हों या कानूनी पेशे की भूमिकाओं की स्पष्टता और व्यक्तिगत ताकत के इर्द-गिर्द बनती हैं.
टी20 क्रिकेट का उदाहरण देते हुए CJI ने क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी यह उम्मीद नहीं करता कि सूर्य कुमार यादव डेथ ओवर में गेंदबाजी करेंगे या जसप्रीत बुमराह से बैटिंग चेज संभालने को कहा जाएगा. उनसे वही काम करवाया जाता है, जिसमें वे सर्वश्रेष्ठ हैं. उन्होंने समझाया कि लीगल प्रोफेशन में भी यही सिद्धांत लागू होता है. जो वकील हर काम को बराबर करने की कोशिश करते हैं, उन्हें इस पेशे में बहुत कम इनाम मिलता है. इसके उलट जो वकील समय के साथ यह पहचान लेते हैं कि उनकी सोच और क्षमता किस ‘नेचुरल डिसिप्लिन’ में सबसे बेहतर बैठती है, वही आगे चलकर पहचान बनाते हैं.
सीजेआई ने बताया कौन होते है सफल वकील?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह सवाल है कि मैं इस प्रोफेशन में कहां फिट होता हूं? युवा वकीलों को जल्दी पूछ लेना चाहिए और बार-बार उस पर लौटना चाहिए. उनके मुताबिक, सफल वकील वही होते हैं जो किसी मोड़ पर ‘सब कुछ करने’ की कोशिश छोड़कर किसी एक क्षेत्र में गहराई से अभ्यास करना शुरू कर देते हैं. अपने संबोधन में उन्होंने लीगल एजुकेशन और वास्तविक प्रैक्टिस के अंतर पर भी बात की. उन्होंने इसे ‘मानचित्र सीखने और जमीन पर चलने’ के फर्क के रूप में समझाया. सीजेआई ने कहा कि किताबें थ्योरी सिखाती हैं, लेकिन असली प्रैक्टिस अनुशासन, जिम्मेदारी और सीमाओं के भीतर काम करने की क्षमता मांगती है.
प्रोफेशनल क्रेडिबिलिटी लीगल सिस्टम की रीढ़: CJI
इसके साथ ही उन्होंने ईमानदारी और प्रोफेशनल क्रेडिबिलिटी को लीगल सिस्टम की रीढ़ बताया. सीजेआई ने कहा कि वकीलों के रोजमर्रा के फैसले न्याय व्यवस्था में भरोसा मजबूत भी कर सकते हैं और कमजोर भी. भाषण के अंत में उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद के सूत्र “सत्यं वद, धर्मं चर” का उल्लेख करते हुए कहा कि यही मूल्य लीगल प्रोफेशन की नैतिक नींव हैं. उन्होंने ग्रेजुएट्स से कहा कि यह पेशा हर दिन असाधारण प्रदर्शन नहीं, बल्कि कठिन समय में भरोसे की मांग करता है और वही भरोसा एक वकील को बनाता है.