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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में होली पर सोने-चांदी नहीं बल्कि शक्कर से बने हार चढ़ाए जाते हैं. होलिका दहन के समय माता को ये मीठे आभूषण पहनाने की खास परंपरा है. रमाबाई ने ₹40 हजार से यह व्यवसाय शुरू किया और आज होली सीजन में 2 से 3 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं.
बुरहानपुर. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में सोने चांदी से नहीं शक्कर से हार तैयार किए जाते हैं. इस हार को बनाने के लिए शक्कर और रस्सी का इस्तेमाल होता है. मान्यता है कि होली का माता को हार चढ़ाने के बाद लोग अपने घर के बच्चों को पहनाते हैं. रमाबाई यह काम वह पिछले 3 साल से कर रही हैं. जब भी होली का पर्व आता है तो होली के समय में इन हारों की डिमांड बढ़ जाती है, जिससे दो से तीन लाख रुपए की कमाई हो जाती है.
लोकल 18 की टीम को रमाबाई ने जानकारी देते हुए बताया, ‘पहले मैं ग्रहणी थी. कोई काम नहीं था, लेकिन मैंने ₹40000 लगा कर यह व्यवसाय 3 साल पहले शुरू किया. आज मेरी अच्छी कमाई हो रही है. हमारे द्वारा सोना चांदी नहीं शक्कर से हार कंगन और नारियल बनाए जाते हैं. यह आभूषण शकर और धागे से तैयार करते हैं और उसको बेच कर लाखों रुपए की कमाई करते हैं.’ उन्होंने बताया कि होली का त्यौहार आते ही इन चीजों की डिमांड बढ़ जाती है. क्योंकि इसकी मान्यता होती है कि जब होलिका दहन होता है तो होलिका माता को यह हार पहनाया जाता है. यही हार लोग अपने बच्चों के गलों में डालते हैं और अपने जमाई को नारियल भेंट करते हैं.
शादियों में दुल्हन को भेंट किए जाते आभूषण
क्षेत्र की महिलाएं बताती हैं कि शंकर और धागे से बनने वाले यह आभूषण लोग अपनी बेटियों की शादी में भेंट करते हैं. जब भी बेटी की शादी होती है तो रंग-बिरंगे यह आभूषण भी तैयार किए जाते हैं. रंग-बिरंगे होने से लोगों को बहुत पसंद आते हैं. बाजार में अभी ₹80 किलो यह हार बिक रहे हैं, जो लोग खरीदी करने के लिए आ रहे हैं. रमाबाई भी 3 साल से यह हार बेचकर लखपति बन गई है. हर साल 2 से 3 लाख रुपए की कमाई करती हैं.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें