भोपाल. मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी छवि मजबूत करने और जमीनी स्तर पर विकास को गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य की पहली ‘कृषि कैबिनेट’ बैठक आज 2 मार्च को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी गांव में हो रही है. यह बैठक भिलटदेव मंदिर परिसर में तंबू में आयोजित की जा रही है, जो आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है, जिसके तहत किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को उद्योग से जोड़ने और ‘बगीचे से बाजार तक’ जैसी योजनाओं को मजबूत करने पर फोकस रहेगा.
सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक का कदम न सिर्फ कृषि प्रधान क्षेत्रों में नीतिगत फैसले लेने का माध्यम बनेगा बल्कि आदिवासी बहुल निमाड़ अंचल के 7 जिलों खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और अलीराजपुर को सीधे संबोधित करेगा. इन जिलों में केला और कपास का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, इसलिए स्थानीय चुनौतियों जैसे सिंचाई, फूड प्रोसेसिंग और बाजार पहुंच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. बैठक के बाद मुख्यमंत्री किसानों और प्रबुद्धजनों से संवाद करेंगे, जिससे नीतियां और अधिक प्रभावी बन सकेंगी.
निमाड़ क्षेत्र की 28 विधानसभा सीटों में से आधी पर कांग्रेस
यह पहल राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निमाड़ क्षेत्र की 28 विधानसभा सीटों में से आधी पर कांग्रेस और आधी पर भाजपा का कब्जा है. 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी वोट बैंक को साधना सरकार की रणनीति का हिस्सा लगता है. बैठक में 17 विभागों कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, सहकारिता, उद्योग आदि का समन्वय होगा. पूरा मंत्रिमंडल पूरे दिन नागलवाड़ी में रहेगा. शाम को मुख्यमंत्री और मंत्री भगोरिया हाट में शामिल होंगे, जो आदिवासी समुदाय का प्रमुख त्योहार है. इससे सरकार की सक्रिय मौजूदगी और जन-केंद्रित छवि मजबूत होगी. होली से ठीक पहले होने वाली इस बैठक से किसानों को बड़ी सौगातें मिलने की उम्मीद है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं.
पहली कृषि कैबिनेट का ऐतिहासिक महत्व
मध्य प्रदेश में पहली बार कृषि फोकस वाली कैबिनेट बैठक जनजातीय क्षेत्र में हो रही है. यह ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ की शुरुआत है. बैठक में किसानों की आय दोगुनी करने, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन पर चर्चा होगी.
नागलवाड़ी का चयन क्यों?
नागलवाड़ी आदिवासी बहुल गांव है जहां भिलटदेव मंदिर आदिवासी आस्था का केंद्र है. यहां केला-कपास उत्पादन प्रमुख है. बैठक से स्थानीय मुद्दों जैसे सिंचाई परियोजनाओं और फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग पर फैसले संभव हैं.
17 विभागों का समन्वय, किसानों से सीधा संवाद
कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, सहकारिता, उद्योग सहित 17 विभाग शामिल होंगे. इससे कृषि को उद्योग से जोड़ने और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने की योजनाएं मजबूत होंगी. बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों और बुद्धिजीवियों से बातचीत करेंगे. उनकी मांगें सुनी जाएंगी और फीडबैक नीतियों में शामिल होगा.
भगोरिया हाट में भागीदारी, 7 आदिवासी जिलों पर फोकस
शाम को मुख्यमंत्री और मंत्री भगोरिया पर्व में शामिल होंगे. यह आदिवासी संस्कृति से जुड़ाव दिखाएगा और सरकार की पहुंच बढ़ाएगा. यह बैठक निमाड़ के 7 आदिवासी जिलों पर फोकस कर रही है. स्थानीय किसानों की फूड प्रोसेसिंग यूनिट जैसी मांगें पूरी हो सकती हैं. सरकार की यह कोशिश आदिवासी समुदाय में विश्वास बढ़ाएगी और ग्रामीण विकास को नई गति देगी.