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सीहोर जिले के आष्टा तहसील के ग्राम दलपतपुरा में ग्रामीणों ने एक बंदर की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से किया. वर्षों से गांव में रह रहे इस वानर से लोगों का गहरा लगाव था. उसकी तेरहवीं पर पूरे गांव ने भोज कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी. यह घटना पशु प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बन गई.
सीहोर के आष्टा में बंदर की मौत से शोक की लहर है.
सीहोर. जिले के आष्टा तहसील के ग्राम दलपतपुरा में मानवीय संवेदनाओं की एक अनोखी मिसाल सामने आई है. यहां ग्रामीणों ने एक बंदर की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से किया और तेरहवीं पर पूरे गांव को भोज कराया. पिछले कुछ वर्षों से गांव में रह रहा यह वानर ग्रामीणों के बीच ऐसा घुलमिल गया था कि लोग उसे परिवार का सदस्य मानने लगे थे. उसकी अचानक एक हादसे में मौत की खबर फैलते ही गांव में शोक का माहौल बन गया. 13 दिन पहले हुई मौत ने कई परिवारों में मातम जैसा माहौल बना दिया था. बच्चे, युवा और बुजुर्गों ने उस बंदर को बहुत याद किया. गांव वालों ने अंतिम संस्कार के दौरान ही तेरहवीं भोज के बारे में रणनीति बना ली थी. इस कार्यक्रम में पूरा गांव जुटा.
ग्रामीण हरदयाल पटेल ने बताया कि वो बंदर जरूर था, लेकिन कई सालों से वह गांव में ही रहता था. अन्य ग्रामीण सेवंती बाई मीणा का कहना है कि यह वानर रोज गांव के पेड़ों पर अठखेलियां करता, बच्चों के साथ खेलता और घरों के बाहर रखे सब्जी-रोटी खा लेता था. समय के साथ लोगों का उससे आत्मीय जुड़ाव हो गया. जब उसकी मौत हुई तो ग्रामीणों ने इसे केवल एक जानवर की मृत्यु नहीं, बल्कि अपने साथी के बिछड़ने जैसा माना. इसी भावनात्मक जुड़ाव ने पूरे गांव को एक साथ खड़ा कर दिया. सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार और त्रयोदशी करने का निर्णय लिया गया.
गांव में पसरा मातम
हादसे में बंदर की मौत के बाद दलपतपुरा में शोक जैसा माहौल रहा. ग्रामीणों ने बताया कि सुबह जब उसकी मृत अवस्था देखी गई तो महिलाएं और बच्चे रो पड़े. कुछ बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों से गांव में रह रहे इस वानर ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया. यही कारण रहा कि हर घर में उसकी चर्चा होती रही. ग्रामीणों ने गांव के बाहर विधि विधान से चिता तैयार की. मंत्रोच्चार के बीच वानर का दाह संस्कार किया गया. उसके चित्र पर माल्यार्पण किया गया और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई. यह दृश्य गांव के लिए भावुक कर देने वाला था.
तेरहवीं में जुटा पूरा गांव
तेरहवीं के अवसर पर गांव में सामूहिक भोज रखा गया. ग्रामीणों ने इसे आत्मीय श्रद्धांजलि बताया. महिलाओं ने प्रसाद तैयार किया और युवाओं ने व्यवस्था संभाली. लोगों ने कहा कि यह आयोजन किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हम सभी ग्रामीणों की इच्छा से हो रहा है. गांव में सब मिलकर एक परिवार और एक गांव वाली भावना होती है. ऐसे में वानर की मौत पर पूरा गांव एकजुट हो गया. सबने मिलकर उसके तेरहवीं भोज का इंतजाम किया. जिसकी जैसी श्रद्धा रही, उसने वैसा सहयोग दिया. अब इस मामले को लेकर आसपास के 50 गांवों में चर्चा हो रही है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें