बृजेन्द्र मिश्रा, भोपाल26 मिनट पहले
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अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव के पहले राज्य सरकार ने छोटी आबादी वाले मजरे टोलों तक सड़क बनाने का प्लान तैयार किया है। दिसम्बर 2027 में होने वाले पंचायत चुनाव के पहले जून 2027 तक प्लान के आधार पर गांवों में सड़कों का जाल बिछाकर सम्पूर्ण ग्राम विकास की अवधारणा को मूर्त रूप देना का काम होगा।
यह काम ग्राम पंचायतों से कराया जाएगा और हर जनपद में कम से कम तीन करोड़ के काम कराए जाएंगे। चूंकि एक विधानसभा में कम से कम दो जनपद क्षेत्र होते हैं, इसलिए एक विधानसभा में छह करोड़ तक के सिर्फ सड़कों के काम कराए जाएंगे।
मोहन यादव सरकार ने सुगम संपर्कता परियोजना के नाम पर एक्शन प्लान तैयार कर कलेक्टरों, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत और अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक महात्मा गांधी नरेगा को इसके एग्जीक्यूशन की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री प्रहलाद पटेल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि सुगम संपर्कता परियोजना प्रारंभ हो गई है। इस परियोजना से एक गांव से दूसरे गांव को जोडने वाली सड़क बनेगी। हर जनपद में तीन करोड़ तक के काम होंगे। सिपरी सॉफ्टवेयर से कार्यों का चयन होगा व डीपीआर बनेगी। गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए ड्रोन तकनीक से कार्यों की निगरानी कराई जाएगी।
परियोजना में तय खास बातें
- 100 से अधिक आबादी वाले मजरे-टोले इस परियोजना से जुड़ेंगे। ये ऐसे मजरे टोले होंगे जहां अब तक बारहमासी सड़क संपर्क नहीं है, इन्हें प्राथमिकता के आधार पर सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा।
- सड़क निर्माण कार्य में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
- सड़क निर्माण से पहले SIPRI (Software for Identification & Planning of Rural Infrastructure) और RIMS पोर्टल पर परियोजना की एंट्री अनिवार्य की गई है।
- डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) भी SIPRI के माध्यम से तैयार होगी।
- परियोजना में ड्रेनेज, एंबैंकमेंट और अन्य तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

क्वालिटी टेस्टिंग और मॉनिटरिंग ऐसे होगी
- सड़क निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री का परीक्षण अधिकृत प्रयोगशालाओं से कराया जाएगा।
- कार्यों की मॉनिटरिंग SIPRI पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
- कम से कम 10% कार्यों का निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
- ग्रामीण सड़कों के निर्माण और निरीक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया गया है। ड्रोन से निगरानी तीन चरणों में होगी। पहला फेज ले-आउट के समय, दूसरा निर्माण के दौरान और तीसरा फेज कार्य पूर्ण होने के 15 दिन के भीतर होगा।
- ड्रोन से प्राप्त फोटो (JPEG) और वीडियो (MP4) SIPRI पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा।
- इसके लिए एमपी आरआरडीए के सहयोग से सभी जिलों के कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री जनपद पंचायत, एसडीओ आरईएस और उपयंत्रियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
- निर्माण एजेंसी, सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी सीईओ जिला पंचायत की होगी।
31 मार्च तक जिलों से मांगे प्रस्ताव
परिषद ने अलग-अलग कार्यों के लिए मार्च 2026 तक की समय-सीमा तय की है। 31 मार्च 2026 तक सभी प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए कहा गया है। निर्देशों में कहा गया है कि नई सड़क का चिन्हांकन सब इंजीनियर द्वारा ट्रांजिट वॉक कर किया जाएगा। मोबाइल एप से सर्वे के दौरान यह तय किया जाएगा कि सर्वे पैदल चलकर ही किया गया है। इसके बाद प्रस्ताव सहायक यंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसमें प्रस्तावित सड़क में शासकीय भूमि, निजी भूमि, वन भूमि की जानकारी भी अलग से देना होगी। सभी सड़कों में सुगम जल निकासी के लिए एक बैलेंसिंग कलवर्ट लिया जाएगा। हर एक किमी में चार स्थानों पर ड्रेन पाइप लिए जाएंगे और इस जल निकासी का उपयोग किसानों द्वारा खेती के लिए किया जा सकेगा। इसमें कहा गया है कि मनरेगा के अंतर्गत पुराने कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा आगामी आदेश तक ‘सुगम संपर्क परियोजना’ के अतिरिक्त अन्य कार्य स्वीकृत नहीं किए जाएंगे।
