आज के समय में कार खरीदना एक बड़ा फैसला हो गया है. खासकर जब बात फ्यूल ऑप्शन की आती है. विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरों में डीजल और CNG दो पॉपुलर फ्यूल ऑप्शन हैं. डीजल कारें अपनी मजबूती और लंबी दूरी की क्षमता के लिए जानी जाती हैं, जबकि CNG कारें सस्ते रनिंग कॉस्ट और ईको फ्रेंडली नेचर के लिए जानी जाती हैं.
ऐसे में सवाल उठता है कि कौन सा ऑप्शन आपके लिए बेहतर है? ये आपके ड्राइविंग पैटर्न, बजट और जरूरतों पर निर्भर करता है. फरवरी 2026 में दिल्ली में डीजल की कीमत लगभग ₹87.67 प्रति लीटर है, जबकि CNG की कीमत ₹77.09 प्रति किलोग्राम है. आइए इन दोनों के बारे में जानते हैं, ताकि आप सही निर्णय ले सकें.
कीमत और रनिंग कॉस्ट
सबसे पहले रनिंग कॉस्ट की बात करते हैं. CNG कारों का मुख्य फायदा उनका कम खर्च है. उदाहरण के लिए, एक औसत CNG कार 25-30 किमी प्रति किलोग्राम माइलेज देती है. अगर आप 1 किमी चलाते हैं, तो CNG का खर्च लगभग ₹2.77 आता है.
वहीं, डीजल कारें 20-25 किमी प्रति लीटर माइलेज देती हैं. डीजल का रनिंग कॉस्ट प्रति किमी ₹3.90 के आसपास पड़ता है. अगर आप सालाना 20,000 किमी चलाते हैं, तो CNG से आपको ₹55,400 का खर्च आएगा, जबकि डीजल से ₹78,000 के करीब. मतलब CNG से सालाना ₹22,600 की बचत होगी. हालांकि, CNG कारों की शुरुआती कीमत डीजल से थोड़ी ज्यादा होती है. जैसे कि टाटा पंच CNG की कीमत ₹7.3 लाख से शुरू होती है, जबकि डीजल वेरिएंट थोड़ा सस्ता पड़ सकता है.
माइलेज और परफॉर्मेंस
माइलेज के मामले में CNG आगे है. लोकप्रिय कारों जैसे मारुति स्विफ्ट CNG 32.85 किमी/केजी देती है, जबकि हाइवे पर डीजल बेहतर होता है, जैसे हुंडई वेन्यू डीजल का माइलेज 24 किमी/लीटर है. हालांकि, CNG में पावर कम होती है. जैसे नेक्सॉन CNG में 100hp, लेकिन डीजल में ज्यादा टॉर्क मिलता है. अगर आप हाइवे पर ज्यादा चलाते हैं या भारी लोड लेते हैं, तो डीजल बेहतर विकल्प है. वहीं, शहर में ट्रैफिक के लिए CNG की हाई माइलेज फायदेमंद है. रियल-वर्ल्ड टेस्ट में टाटा अल्ट्रोज सीएनजी 25.11 किमी/केजी देती है, जो डीजल की 24.2 किमी/लीटर से बेहतर है.
मेंटेनेंस और सर्विसिंग
मेंटेनेंस में डीजल कारें महंगी पड़ती हैं. डीजल इंजन के कॉम्प्लेक्स पार्ट्स की वजह से स्पेयर पार्ट्स और सर्विस कॉस्ट ज्यादा होती है. इसमें सालाना 10 से 15 हजार रुपये तक का खर्च हो सकता है. CNG कारों में मेंटेनेंस थोड़ा ज्यादा होता है, क्योंकि किट की जांच जरूरी है. जैसे स्पार्क प्लग और फिल्टर्स की फ्रीक्वेंट सर्विसिंग.
कुल मिलाकर अगर आपकी रनिंग 15,000 किमी से ज्यादा है, तो CNG की बचत मेंटेनेंस को कवर कर लेती है. CNG इंजन की लाइफ पेट्रोल जैसी होती है, लेकिन डीजल से कम वियर एंड टियर है. हालांकि, CNG में साल भर बाद ज्यादा मेंटेनेंस की जरूरत पड़ सकती है अगर रनिंग कम हो. दिल्ली में CNG स्टेशनों की अच्छी उपलब्धता है, लेकिन डीजल हर जगह आसानी से मिल जाता है.
पर्यावरण और अन्य फैक्टर्स
पर्यावरण के लिहाज से CNG क्लीनर है. कम एमीशन, जैसे CO2 और पार्टिकुलेट मैटर. डीजल से ज्यादा प्रदूषण होता है, जिसकी वजह से कई शहरों में डीजल कारों पर प्रतिबंध लग रहे हैं. 2026 में CNG कारें EV के बाद सबसे इको-फ्रेंडली विकल्प हैं. CNG में बूट स्पेस कम होता है टैंक की वजह से, जबकि डीजल में कोई समस्या नहीं है. रीसेल वैल्यू में डीजल बेहतर है अगर कार अच्छी कंडीशन में हो, लेकिन CNG की डिमांड बढ़ रही है. अगर आपकी रनिंग कम है (10,000 किमी/साल), तो डीजल का फायदा नहीं, क्योंकि मेंटेनेंस ज्यादा पड़ेगा. वहीं, ज्यादा रनिंग में CNG 20-30% बचत देती है.
आपके लिए कौन सा सही?
अगर आप शहर में ज्यादा चलाते हैं, कम रनिंग कॉस्ट चाहते हैं और पर्यावरण का ख्याल रखते हैं, तो CNG बेहतर है. जैसे मारुति एर्टिगा CNG या टाटा नेक्सॉन CNG. अगर लंबी ट्रिप्स, ज्यादा पावर और टॉर्क चाहिए, तो डीजल चुनें. जैसे किआ सोनेट डीजल. कुल मिलाकर, 2026 में CNG का फायदा ज्यादा दिख रहा है. खासकर दिल्ली में जहां CNG इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत है. कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव लें और अपना बजट कैलकुलेट करें.