खंडहर होता 100 साल पुराना स्कूल, छत से गिरता प्लास्टर, वॉशरूम में दरवाजा नहीं

खंडहर होता 100 साल पुराना स्कूल, छत से गिरता प्लास्टर, वॉशरूम में दरवाजा नहीं


Last Updated:

Khandwa News: लव जोशी ने लोकल 18 से कहा कि उन्होंने भी इसी स्कूल से पढ़ाई की है. यहां से कई बड़े लोग निकले हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भगवत राव मंडलोई के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं. यह स्कूल शहर की पहचान रहा है लेकिन अब इसकी हालत देख दुख होता है.

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के बीच स्थित शासकीय शाला पड़ावा नंबर 1, जिसे पहले मेन हिंदी स्कूल के नाम से जाना जाता था, आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है. कभी इस स्कूल से बड़े-बड़े अधिकारी, उद्योगपति और जनप्रतिनिधि निकले लेकिन आज यही स्कूल जर्जर हालत में बच्चों की पढ़ाई का सहारा बना हुआ है. स्कूल की छत से प्लास्टर गिर रहा है, खिड़कियों के कांच और जालियां गायब हैं और वॉशरूम तक में दरवाजे नहीं हैं, फिर भी बच्चे यहीं पढ़ने को मजबूर हैं. यह स्कूल करीब 100 साल पुराना बताया जाता है यानी अंग्रेजों के जमाने में इसका निर्माण हुआ था. समय के साथ इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि ऊपर की मंजिल से प्लास्टर गिरने लगा है. कई जगह दीवारों में दरारें साफ दिखाई देती हैं. स्कूल के कमरों की छत जर्जर हो चुकी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है. इसके बावजूद छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी भवन में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं.

स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. वॉशरूम में दरवाजे नहीं हैं, जिससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं खिड़कियों के कांच और जालियां भी गायब हैं. कई कमरों में प्लास्टर झड़ चुका है और दीवारों की हालत बेहद खराब हो गई है. बरसात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब छत से पानी टपकता है.

इस स्कूल से निकले कई बड़े नाम
स्थानीय निवासी और पूर्व छात्र लव जोशी ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने भी इसी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है. इस स्कूल से कई बड़े लोग निकले हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भगवत राव मंडलोई के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यह स्कूल शहर की पहचान रहा है लेकिन अब इसकी हालत देखकर दुख होता है. नगर निगम शिक्षा उपकर के नाम पर टैक्स तो वसूलता है लेकिन स्कूल के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

गरीब बच्चों के पास नहीं कोई दूसरा विकल्प
इस स्कूल में ज्यादातर गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके परिवार प्राइवेट स्कूल की फीस देने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में बच्चों के पास सरकारी स्कूल में पढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. जर्जर भवन में पढ़ाई करना उनकी मजबूरी बन गया है. अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है.

शिक्षा विभाग की चुप्पी
इस मामले को लेकर जब शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो न तो उन्होंने फोन रिसीव किया और न ही कार्यालय में उपलब्ध रहे. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की मरम्मत को लेकर जिम्मेदारों की लापरवाही साफ नजर आ रही है. स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि इस जर्जर स्कूल भवन को जल्द से जल्द सुधार कर नई बिल्डिंग बनाई जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके. फिलहाल सवाल यह है कि आखिर कब तक बच्चे खतरे के साये में पढ़ने को मजबूर होंगे.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



Source link