विदिशा में इस वर्ष धुरेंडी का पर्व चंद्रग्रहण के कारण एक दिन की देरी से बुधवार को मनाया गया। 105 साल बाद ऐसा ज्योतिषीय संयोग बना जब होलिका दहन के अगले दिन धुरेंडी नहीं मनाई गई। शहर भर में हुरियारों की टोलियां ढोल-नगाड़ों के साथ निकलीं और आदर्श होली उत्सव समिति के तत्वावधान में पारंपरिक मूर्खाधिराज का जुलूस निकाला गया, जिसमें पूर्व वित्तमंत्री राघवजी शामिल हुए। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार चंद्रग्रहण के चलते धुरेंडी होलिका दहन के अगले दिन नहीं मनाई जा सकी। ठीक 105 वर्ष पूर्व भी प्रतिपदा तिथि पर चंद्रग्रहण होने से धुरेंडी एक दिन बाद मनाई गई थी। जानकारी के मुताबिक, तिथियों के क्षय के कारण लगभग 11 वर्ष पूर्व भी धुरेंडी एक दिन आगे बढ़ी थी। माधवगंज चौराहे से निकला मूर्खाधिराज का जुलूस धुरेंडी के अवसर पर शहर में आदर्श होली उत्सव समिति के तत्वावधान में धुलेड़ी का एक बड़ा जुलूस निकाला गया। माधवगंज चौराहे से परंपरागत मूर्खाधिराज की सवारी शुरू हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बड़े बाजार तक पहुंची। जुलूस में बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और हुरियारे शामिल हुए। ऑटो में सवार होकर निकले पूर्व वित्तमंत्री राघवजी इस वर्ष भी पूर्व वित्तमंत्री राघवजी मूर्खाधिराज के रूप में जुलूस का नेतृत्व करते हुए ऑटो में सवार नजर आए। उन्होंने शहरवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं। इस जुलूस में उनके साथ पूर्व विधायक शशांक भार्गव सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे और सभी ने एक-दूसरे को रंग लगाकर उत्सव का आनंद लिया। शहरभर में फाग गायन और उड़े रंग-गुलाल दिनभर पूरे शहर में रंग-गुलाल की धूम रही। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक अंदाज में होली खेली। कई स्थानों पर फाग गायन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने नाचते-गाते हुए त्योहार मनाया।
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