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Shivpuri News: बीते कुछ वर्षों में यह चर्चा तेजी से फैली कि किले के भीतर प्राचीन खजाना दबा हुआ है. इसके बाद बाहरी लोगों का यहां आना शुरू हुआ. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में कई बार जेसीबी और फावड़ों से खुदाई की गई.
शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित बैराड़ का प्राचीन किला एक रहस्यमयी स्थल बन चुका है. कभी मजबूत परकोटे और ऊंची दीवारों से घिरा यह किला अब जगह-जगह से टूटा और धंसा हुआ दिखाई देता है. स्थानीय मान्यता है कि बैराड़ को प्राचीन समय में विराटनगर कहा जाता था और इसका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है. बीते कुछ वर्षों में खजाने की अफवाहों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को भारी नुकसान पहुंचाया है. रात के अंधेरे में बाहरी लोगों द्वारा की गई अवैध खुदाई से किले की संरचना कमजोर हो गई है. ग्रामीणों का दावा है कि लालच में यहां आने वाले कई लोगों के साथ अनहोनी घटनाएं हुईं, जिससे अब किले के आसपास दहशत का माहौल है. इतिहास की विरासत अब उपेक्षा और भय की कहानी बनती जा रही है. ग्रामीणों के अनुसार, बैराड़ क्षेत्र को प्राचीन काल में विराटनगर के नाम से जाना जाता था. लोककथाओं में कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय इसी क्षेत्र में बिताया था. इसी कारण यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. किले के आसपास पुराने पत्थरों, टूटी दीवारों और परकोटों के अवशेष आज भी इसकी प्राचीनता की गवाही देते हैं. बुजुर्ग बताते हैं कि पहले यहां चारों ओर मजबूत बाउंड्री थी और अंदर विशाल आंगननुमा संरचना दिखाई देती थी. समय के साथ संरक्षण के अभाव और लोगों की अनदेखी के कारण किला जर्जर होता चला गया. पौराणिक कथाओं ने इस स्थल को रहस्य से जोड़ दिया, जिससे लोगों में इसके प्रति आकर्षण और जिज्ञासा बनी रही. यही जिज्ञासा आगे चलकर खजाने की अफवाहों में बदल गई.
बीते कुछ सालों में यह चर्चा तेजी से फैली कि किले के भीतर सोना-चांदी और प्राचीन खजाना दबा हुआ है. इसके बाद बाहरी लोगों का यहां आना शुरू हुआ. ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में कई बार जेसीबी और फावड़ों से खुदाई की गई. किले की दीवारों के पास और आंगन के हिस्सों में गहरे गड्ढे आज भी इस बात का प्रमाण देते हैं कि यहां लगातार जमीन खोदी गई. खुदाई के कारण कई हिस्सों की जमीन धंस चुकी है और पत्थर गिरने लगे हैं. कभी जो परकोटा मजबूत हुआ करता था, वह अब टूटकर बिखर चुका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन या पुरातत्व विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़े. खजाने की चाहत ने किले की ऐतिहासिक पहचान को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.
अनहोनी की कहानियां और ग्रामीणों में दहशत
किले को लेकर गांव में कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं. बुजुर्गों का कहना है कि जो भी व्यक्ति लालच में आकर यहां धन की खोज करता है, उसके साथ कुछ न कुछ बुरा अवश्य होता है. कुछ लोगों के बीमार पड़ने और कुछ की असामान्य परिस्थितियों में मौत होने की चर्चाएं भी गांव में सुनने को मिलती हैं. हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन लगातार फैलती इन बातों ने ग्रामीणों के मन में भय पैदा कर दिया है. रात के समय किले के पास से गुजरने वाले लोग पत्थर गिरने और अजीब आवाजें सुनाई देने की बात करते हैं. किले के आसपास अब सन्नाटा पसरा रहता है और कोई भी व्यक्ति वहां घर बनाकर रहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता. डर और अफवाहों ने इस ऐतिहासिक स्थल को वीरान बना दिया है.
उपेक्षा के बीच संरक्षण की दरकार
इतिहास और लोकआस्था से जुड़ा यह किला आज संरक्षण की बाट जोह रहा है. यदि समय रहते इस धरोहर की सुरक्षा नहीं की गई, तो अवैध खुदाई और अंधविश्वास इसके अस्तित्व को पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यहां सुरक्षा गार्ड, बाउंड्री वॉल और सूचना पट्ट लगाए जाने चाहिए ताकि बाहरी लोगों की आवाजाही नियंत्रित हो सके. साथ ही पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे कर वास्तविक ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाया जाना जरूरी है ताकि अफवाहों पर विराम लगे. यदि इसे संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो क्षेत्र की पहचान भी बढ़ सकती है और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं. फिलहाल यह किला इतिहास, रहस्य और उपेक्षा के त्रिकोण में खड़ा अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है.
स्थानीय लोगों का दावा
स्थानीय निवासी रामश्री ने कहा कि किले के आसपास रहना आसान नहीं है. उनके अनुसार कई बार लोगों को जमीन पर सोने-चांदी जैसा कुछ चमकता दिखाई देता है लेकिन जैसे ही कोई उसे उठाने की कोशिश करता है, उसके जीवन में परेशानियां शुरू हो जाती हैं. रामश्री बताते हैं कि गांव में ऐसे कई उदाहरण सुनने को मिलते हैं, जिससे लोग डर जाते हैं. उनका मानना है कि लालच में यहां जाना ठीक नहीं और किले के पास बसना जोखिम भरा है.
राजकुमारी की आपबीती
किले के पास पहले रहने वाली राजकुमारी बताती हैं कि उनका मकान भी इसी क्षेत्र में था लेकिन परिवार लगातार बीमारियों और परेशानियों से जूझता रहा. बच्चों की तबीयत बार-बार खराब होती थी और घर में अजीब सा भय बना रहता था. इसी कारण उन्होंने वह मकान छोड़कर दूसरी जगह घर बना लिया. राजकुमारी कहती हैं कि किले के आसपास रहने वाला हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से घिरा नजर आता है, इसलिए अब कोई वहां बसने की हिम्मत नहीं करता.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.