नीलगाय अचानक नहीं बढ़ीं…छतरपुर के किसानों ने बताया फसलों के नुकसान का असली कारण

नीलगाय अचानक नहीं बढ़ीं…छतरपुर के किसानों ने बताया फसलों के नुकसान का असली कारण


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Chhatarpur News: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में नीलगाय किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही हैं और हर साल बड़ी मात्रा में फसलें नुकसान की चपेट में आ रही हैं. हालांकि स्थानीय किसानों और जानकारों का कहना है कि नीलगाय अचानक नहीं बढ़ीं बल्कि जंगल और जंगली पेड़ों के खत्म होने के कारण वे खेतों की ओर आने लगी हैं. पहले जंगलों में पर्याप्त जंगली फल और पत्तियां मिलने से नीलगाय खेतों की फसलों की तरफ नहीं जाती थीं. लेकिन समय के साथ जंगल कम हुए और खेती की जमीन बढ़ी तो नीलगायों के प्राकृतिक भोजन के स्रोत खत्म होने लगे. अब मजबूरी में ये जानवर किसानों की मसूर, मटर, अलसी और गेहूं जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में किसान इन दिनों नीलगायों से काफी परेशान हैं. किसानों का कहना है कि हर साल उनकी फसलें इन जंगली जानवरों की वजह से खराब हो जाती हैं. हालांकि स्थानीय किसानों और जानकारों का मानना है कि नीलगाय अचानक नहीं बढ़ीं, बल्कि बदलते पर्यावरण और जंगलों के कम होने के कारण यह समस्या बढ़ी है.

पहले जंगलों में ही मिल जाता था भोजन
किसान कालीचरण सोनी बताते हैं कि नीलगाय पहले से ही इस इलाके में मौजूद थीं. पहले यहां घने जंगल हुआ करते थे और अलग-अलग मौसम में जंगली पेड़ों पर फल और पत्तियां मिल जाती थीं. नीलगाय इन्हीं जंगली पेड़ों और फलों को खाकर अपना पेट भर लेती थीं, इसलिए खेतों की फसलों की ओर उनका ध्यान कम जाता था.

कई जंगली पेड़ थे नीलगाय का सहारा
स्थानीय लोगों के अनुसार नीलगाय अलग-अलग मौसम में अलग-अलग जंगली पेड़ों की पत्तियां और फल खाती थीं. ठंड के मौसम में घोंट नाम के पेड़ की पत्तियां और फल खाती थीं. फरवरी में इंगुआ के पेड़ उनके भोजन का मुख्य स्रोत होते थे. गर्मियों में तेंदू और महुआ के पेड़ों से उन्हें पर्याप्त भोजन मिल जाता था. बरसात के मौसम में चारों तरफ हरियाली होने से उन्हें चारा आसानी से मिल जाता था.

जंगल कटे तो खेतों में आने लगीं नीलगाय
धीरे-धीरे जंगल और पहाड़ों के पेड़ कटने लगे और कई जगहों पर जंगल की जमीन खेती में बदल गई. इससे नीलगायों के पसंदीदा जंगली पेड़ लगभग खत्म हो गए. अब जब उन्हें जंगल में पर्याप्त भोजन नहीं मिलता तो वे मजबूर होकर खेतों की ओर आ जाती हैं.

इन फसलों को ज्यादा नुकसान
किसानों का कहना है कि नीलगाय खासतौर पर मसूर, मटर, अलसी और गेहूं जैसी फसलों की पत्तियां खाना पसंद करती हैं. जब तक फसल में पत्तियां रहती हैं तब तक वे खेतों में आकर नुकसान पहुंचाती हैं.

शिकार बंद होने से भी बढ़ी संख्या
किसानों का यह भी कहना है कि पहले लोग नीलगाय का शिकार करते थे जिससे उनकी संख्या नियंत्रित रहती थी. लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण कानून के कारण लोग शिकार करने से डरते हैं. यही वजह है कि कई इलाकों में नीलगायों की संख्या बढ़ गई है और किसान परेशान हैं.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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