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Sidhi News: शिवबालक कुशवाहा ने लोकल 18 से कहा कि होरा का असली स्वाद तभी आता है, जब चने के पौधे खेत से ताजे तोड़े जाएं और उन्हें लकड़ी की आग में भूनकर उसी समय खाया जाए. कई जगहों पर लोग इसमें नमक के साथ हरा धनिया, लहसुन और मिर्च की चटनी मिलाकर भी खाते हैं.
सीधी. मध्य प्रदेश में दलहनी चने की प्रमुख रबी फसल अब पकने की अवस्था में आ गई है और कई क्षेत्रों में कटाई की तैयारी शुरू हो चुकी है. विंध्य क्षेत्र में चने का होरहा खूब पसंद किया जाता है. कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में इसे होरा भी बोलते हैं, खासकर होली के आसपास मार्च में लोग खेतों में इकट्ठा होकर गर्म-गर्म चने का होरा खाते हैं. सीधी के 70 वर्षीय शिवबालक कुशवाहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि चने का होरा बनाने की परंपरा गांवों में वर्षों से चली आ रही है. जब चने की फसल हरी और दानों से भरी होती है, तब किसान खेत से ही पौधे उखाड़कर आग में भूनते हैं. इसके बाद पौधों से दाने निकालकर सभी लोग मिलकर खाते हैं. ताजे चने का यह स्वाद इतना खास होता है कि लोग इसे किसी त्योहार की तरह मनाते हैं.
शिवबालक ने कहा कि होरा का असली स्वाद तभी आता है, जब चने के पौधे खेत से ताजे तोड़े जाएं और उन्हें लकड़ी की आग में भूनकर तुरंत खाया जाए. कई जगहों पर लोग इसमें नमक के साथ हरा धनिया, मिर्च और लहसुन की चटनी मिलाकर भी खाते हैं. कुछ क्षेत्रों में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि स्थानीय बाजारों में भी होरा बिकने लगा है. विंध्य के रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. फसल के मौसम में गांव के लोग शाम के समय खेतों में इकट्ठा होकर होरा भुंजते हैं. इस दौरान खेतों में हंसी-मजाक, बातचीत और मिलन का माहौल बन जाता है.
एकता और खुशी का प्रतीक
शिवबालक कुशवाहा के अनुसार, होरा सिर्फ खाने की चीज नहीं है बल्कि यह गांव की आपसी एकता और खुशी का प्रतीक भी है. कई किसान अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी खेतों में बुलाकर उन्हें होरा खिलाते हैं. खेत की मेड़ पर बैठकर आग जलाना और गर्म-गर्म चने खाना ग्रामीण जीवन का अनोखा अनुभव होता है.
सेहत के लिए भी फायदेमंद
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा के मुताबिक, हरे चने का होरा स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. विंध्य क्षेत्र में चने का होरा आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है. खेतों में बनने वाला यह देसी स्वाद ग्रामीण जीवन की सादगी, अपनापन और परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.